प्राइमरी स्कूल के बच्चों को अब जाति-निवास प्रमाण पत्र बनाने के लिए तहसील कार्यालयों के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा बल्कि अब उन्हें जाति -निवास प्रमाण पत्र बनाकर स्कूलों में ही दिया जायेगा। इसके लिए बस बच्चों को संकुल केन्द्रों के माध्यम से दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे। जिसके बाद खुद शिक्षा विभाग तहसील कार्यालय से प्रमाण पत्र बनाकर बच्चों में उनका वितरण किया जायेगा।

स्कूली बच्चों के लिए जाति और निवास प्रमाण पत्र काफी मायने रखता है। इसके जरिये स्कूली बच्चों को आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक लाभ प्राप्त होता है मगर अक्सर देखने को मिलता है कि इन दस्तावेजों को बनवाने के लिए बच्चों और उनके अभिभावकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। खासकर सुदूर अंचल में बसे बच्चों के लिए यह टेढ़ी खीर साबित होती है। यही वजह है कि राज्य शासन ने इस समस्या को गंभीरता से लिया है और प्राइमरी स्कूल के बच्चों को स्कूल में ही जाति और निवास प्रमाण पत्र उपलब्ध हो सके, इसके लिए दिशा निर्देश जारी किये हैं। फिलहाल यह योजना प्राइमरी स्कूल यानि कक्षा पहली से लेकर पांचवी तक के बच्चों के लिए लागू किया गया है जिसमें अब बच्चों को जाति और निवास प्रमाण पत्र बनाकर स्कूलों में ही वितरण किया जायेगा।
इस योजना के लागू होने से निःसंदेह ग्रामीण इलाकों के स्कूली बच्चों को बड़ी राहत मिलेगी और स्कूलों में ही जाति-निवास प्रमाण पत्र उपलब्ध होने के बाद शासन की कई योजनाओं का लाभ भी वे उठा पायेंगे। इसके लिए अब बच्चों और उनके अभिभावकों को तहसील कार्यालयों के चक्कर नहीं पड़ेंगे।
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