CBI करेगी आठ दिन तक पूछताछ, रिमांड आवेदन में पुलिस-प्रशासन और प्रभावशाली लोगों को प्रोटेक्शन मनी देने का दावा
रायपुर। महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप का मुख्य संचालक सौरभ चंद्राकर 12 नवंबर तक CBI की कस्टोडियल रिमांड पर रहेगा। बुधवार को उसे रायपुर स्थित CBI की स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया, जहां से एजेंसी को आठ दिनों तक पूछताछ की अनुमति मिली। इस दौरान महासमुंद के पूर्व कांग्रेस विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर और महादेव ऐप मामले में ED के आरोपी पैनल ऑपरेटर विशाल रमानी ने भी सौरभ से मुलाकात की।

कोर्ट रूम में पूर्व विधायक और पैनल ऑपरेटर से मुलाकात
कोर्ट में CBI और बचाव पक्ष के वकीलों के बीच बहस के दौरान सौरभ चंद्राकर अधिकारियों और वकीलों से घिरा हुआ था। इसी बीच उससे मिलने महासमुंद के पूर्व विधायक एवं पूर्व संसदीय सचिव विनोद सेवनलाल चंद्राकर पहुंचे।
शुरुआत में CBI अधिकारियों ने उन्हें सौरभ से मिलने से रोक दिया। इसके बाद सौरभ ने अधिकारियों को बताया कि विनोद चंद्राकर उसके मामा हैं। फिर दोनों के बीच करीब एक से दो मिनट बातचीत हुई और उन्होंने एक-दूसरे का हालचाल जाना।
इसी दौरान ED केस के आरोपी और महादेव ऐप के पैनल ऑपरेटर विशाल रमानी भी कोर्ट पहुंचे। उन्होंने भी सौरभ से मुलाकात की। दोनों ने कुछ मिनट बातचीत की। सौरभ ने वहां मौजूद वकीलों से रमानी का परिचय भी कराया। इसके बाद विशाल रमानी कोर्ट रूम से बाहर चले गए।
CBI ने रिमांड आवेदन में क्या कहा?
CBI ने रिमांड आवेदन में बताया कि सौरभ चंद्राकर महादेव ऑनलाइन बुक का संस्थापक प्रमोटर है और उसे पूरे नेटवर्क की जानकारी है। एजेंसी उससे पूछताछ कर दूसरे मास्टरमाइंड, हवाला ऑपरेटरों, अवैध कमाई के लाभार्थियों और उनसे जुड़ी संपत्तियों के बारे में जानकारी जुटाना चाहती है।
CBI के मुताबिक, महादेव ऐप का कारोबार चलाने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ प्रभावशाली राजनीतिक लोगों को भी कथित तौर पर प्रोटेक्शन मनी दी जाती थी। एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि यह रकम किन लोगों तक पहुंचाई गई और पूरे नेटवर्क में किसकी क्या भूमिका थी।
ED के गैर-जमानती वारंट पर भी सुनवाई
दूसरी ओर, ED ने अपने गैर-जमानती वारंट को लागू कराने के लिए कोर्ट में आवेदन दिया था। हालांकि, कोर्ट ने इस आवेदन को प्री-मैच्योर बताते हुए स्वीकार नहीं किया।
अब CBI की कस्टोडियल रिमांड के दौरान सौरभ चंद्राकर से आठ दिनों तक पूछताछ होगी। एजेंसी की जांच का मुख्य फोकस महादेव ऐप के आर्थिक नेटवर्क, कथित प्रोटेक्शन मनी और इससे जुड़े लोगों की भूमिका पर रहेगा।












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