इंदिरानगर की कुम्हार बस्ती में दिन-रात चल रही दीये बनाने की तैयारी, बढ़ती लागत के बीच तीन पीढ़ियां संभाल रहीं पारंपरिक कारोबार

Highlights
- दीपावली नजदीक आते ही मिट्टी के दीयों की मांग बढ़ने लगी।
- मिट्टी, धान के भूसे और जलावन की बढ़ती कीमतों से कुम्हार परेशान।
- इंदिरानगर की कुम्हार बस्ती में कई दिनों से चल रही तैयारियां
- त्योहार से पहले ही पके हुए दीये खरीदने पहुंच रहे ग्राहक।
दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। घरों, दुकानों और मंदिरों को रोशन करने वाले मिट्टी के दीयों की मांग भी तेज हो गई है। लेकिन इस बार दीये तैयार करने वाले कुम्हारों के सामने कई चुनौतियां हैं। मिट्टी से लेकर धान के भूसे और जलावन तक की बढ़ती लागत ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इसके बावजूद कुम्हार परिवार दिन-रात मेहनत कर दीपावली के लिए दीये तैयार करने में जुटे हुए हैं।
तीन पीढ़ियों से मिट्टी के दीये बनाने का काम
दीपावली का त्योहार मिट्टी के दीयों के बिना अधूरा माना जाता है। घरों, दुकानों और मंदिरों में दीप जलाने की परंपरा सदियों पुरानी है। यही वजह है कि दीपावली से करीब पखवाड़े भर पहले ही मिट्टी के दीयों की मांग बढ़ने लगती है।
शहर के इंदिरानगर क्षेत्र में दशकों से कुम्हार बस्ती आबाद है। यहां रहने वाले परिवारों की तीन पीढ़ियां मिट्टी के बर्तन और दीये बनाने के पारंपरिक व्यवसाय से जुड़ी हुई हैं। हालांकि बदलते समय के साथ कुम्हारी का यह कारोबार कई चुनौतियों का सामना कर रहा है।
मिट्टी और भूसे की बढ़ती कीमतों से लागत में इजाफा
कुम्हारों के सामने सबसे बड़ी समस्या दीये बनाने के लिए जरूरी सामग्री जुटाने की है। पहले मिट्टी और दीये पकाने के लिए धान का भूसा आसानी से मिल जाता था, लेकिन अब इसके लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। मिट्टी की उपलब्धता में परेशानी और भूसे की बढ़ती कीमतों के साथ लकड़ी व भट्ठे में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्रियों का खर्च भी बढ़ गया है।
इसका सीधा असर दीयों की लागत पर पड़ रहा है। बढ़ते खर्च के चलते इस साल मिट्टी के दीयों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। सीमित संसाधनों और बढ़ती लागत के बीच कुम्हारों के सामने अपने पारंपरिक व्यवसाय को जारी रखने की चुनौती बनी हुई है।
धूप में सुखाने के बाद भट्ठे में पकाए जा रहे दीये
फिलहाल इंदिरानगर की कुम्हार बस्ती में दीपावली की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। कुम्हार परिवार सबसे पहले मिट्टी तैयार करते हैं और फिर उससे कच्चे दीये बनाए जाते हैं। इन दीयों को धूप में सुखाने के बाद भट्ठे में पकाया जाता है। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही दीये बाजार में बिक्री के लिए तैयार होते हैं।
खास बात यह है कि दीपावली में अभी कुछ दिन बाकी हैं, लेकिन पके हुए दीये खरीदने के लिए ग्राहक अभी से कुम्हार बस्ती पहुंचने लगे हैं। बढ़ती मांग के बीच कुम्हार परिवार त्योहार तक पर्याप्त दीये तैयार करने में जुटे हुए हैं।












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