रामलीला मैदान के कार्यक्रम पर ओपी चौधरी का राहुल गांधी पर हमला, बोले- देश को अराजकता में धकेलने की साजिश

वित्त मंत्री ने कांग्रेस के आयोजन को बताया राजनीतिक ड्रामा, 1984 के सिख दंगों का जिक्र कर कांग्रेस पर साधा निशाना

Highlights

  • ओपी चौधरी ने दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस के कार्यक्रम पर उठाए सवाल।
  • राहुल गांधी पर देश में अराजकता फैलाने की कोशिश का लगाया आरोप।
  • त्योहारी सीजन में व्यापारियों को नुकसान पहुंचाने की आशंका जताई।
  • 1984 के सिख दंगों का जिक्र कर कांग्रेस को घेरा।
रामलीला मैदान
रामलीला मैदान

छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस द्वारा आयोजित कार्यक्रम को लेकर राहुल गांधी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि रामलीला मैदान में चल रहा घटनाक्रम लोकतंत्र का सम्मान नहीं, बल्कि देश को अराजकता की ओर धकेलने की सोची-समझी साजिश है। उन्होंने इस आयोजन को चुनाव में जनता द्वारा बार-बार नकारे गए लोगों का राजनीतिक ड्रामा करार दिया।

अराजकता और ‘रिजीम चेंज’ के एजेंडे का लगाया आरोप

ओपी चौधरी ने दावा किया कि इस कार्यक्रम के पीछे कई दुर्भावनापूर्ण उद्देश्य छिपे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके जरिए सिख समुदाय के पुराने जख्मों को कुरेदने, दिल्ली में अशांति पैदा करने और जनता द्वारा चुनी गई सरकार को अस्थिर करने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने यह भी आशंका जताई कि त्योहारी सीजन के दौरान इस तरह के घटनाक्रम से स्थानीय व्यापारियों के कारोबार को नुकसान पहुंच सकता है।

राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए ओपी चौधरी ने कहा, “राहुल गांधी, कान खोलकर सुन लीजिए, यह भारत है, कोई बनाना रिपब्लिक नहीं, जहां जब चाहे दंगे और आगजनी कराकर ‘रिजीम चेंज’ का एजेंडा चला दें। यह सपना देखना बंद कर दीजिए। भारत दुनिया का सबसे पुराना और सबसे मजबूत लोकतंत्र है

ओपी चौधरी
ओपी चौधरी

1 नवंबर को बताया लोकतांत्रिक इतिहास का काला दिन

ओपी चौधरी ने 1 नवंबर की तारीख का जिक्र करते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र का बड़ा काला धब्बा बताया। उन्होंने कहा कि 1984 में इसी दिन कांग्रेस के संरक्षण में सिखों का कत्लेआम हुआ था। इस घटना में हजारों परिवार बेघर हुए और बड़ी संख्या में महिलाओं ने अपने पति खोए।

उन्होंने कहा कि देश इस ऐतिहासिक त्रासदी को भूला नहीं है। ओपी चौधरी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतंत्र और सामाजिक सद्भाव की बात करने से पहले पार्टी को अपने इतिहास पर भी विचार करना चाहिए।

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