छत्तीसगढ़ विधानसभा में बड़ा बदलाव! सदन की मेजों पर लगेंगे टैबलेट, डिजिटल होगी पूरी कार्यवाही
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छत्तीसगढ़ विधानसभा पेपरलेस[/caption]
छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्यवाही को पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस बनाने की तैयारी तेज हो गई है। आगामी बजट सत्र से पहले विधानसभा को ई-सदन के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत सदन की मेजों पर डिजिटल गैजेट्स और टैबलेट लगाए जाएंगे, जिससे विधायकों को प्रश्नोत्तर, कार्यसूची और अन्य विधायी दस्तावेज डिजिटल माध्यम से उपलब्ध हो सकेंगे।
विधानसभा सचिव दिनेश शर्मा के अनुसार, डिजिटाइजेशन का काम तीन महीने में पूरा करने का लक्ष्य है। इस संबंध में प्रस्ताव राष्ट्रीय ई-विधान एप्लिकेशन (NeVA) से जुड़ी व्यवस्था के तहत भेजा गया है। परियोजना पूरी होने के बाद विधानसभा की कार्यवाही में कागजों पर निर्भरता कम करने और विधायी कामकाज को तकनीक आधारित बनाने में मदद मिलेगी।
Chhattisgarh Assembly News: बजट सत्र से पहले डिजिटल होगी विधानसभा
नवा रायपुर के सेक्टर-19 में स्थित छत्तीसगढ़ विधानसभा के नए भवन को डिजिटल सुविधाओं से लैस करने की दिशा में काम किया जा रहा है। करीब 324 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस भवन में ई-सदन व्यवस्था विकसित करने की योजना है।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के मार्गदर्शन में विधानसभा के कामकाज को डिजिटल बनाने की पहल की जा रही है। इसका उद्देश्य सदन की कार्यवाही, विधायकों के प्रश्नों और विधायी दस्तावेजों तक डिजिटल माध्यम से पहुंच आसान बनाना है।
योजना के तहत विधायकों की मेजों पर डिजिटल गैजेट्स और टैबलेट उपलब्ध कराने की तैयारी है। इससे सदन के भीतर आवश्यक सूचनाओं और दस्तावेजों को इलेक्ट्रॉनिक रूप में देखा जा सकेगा।
सदन की मेजों पर लगेंगे डिजिटल गैजेट्स और टैबलेट
छत्तीसगढ़ विधानसभा के पेपरलेस होने के बाद विधायकों को विधायी कामकाज से जुड़ी जानकारी डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।
इसके प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:
- सदन की दैनिक कार्यसूची डिजिटल माध्यम से उपलब्ध होगी।
- तारांकित और अतारांकित प्रश्नों से संबंधित जानकारी देखना आसान होगा।
- बजट भाषण और अन्य विधायी दस्तावेज डिजिटल रूप में उपलब्ध कराए जा सकेंगे।
- कागजों के उपयोग में कमी लाने में मदद मिलेगी।
- सदन की कार्यवाही और दस्तावेजों तक पहुंच अधिक सुविधाजनक हो सकेगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य विधानसभा की प्रक्रियाओं को सरल बनाना और विधायकों को जरूरी जानकारी समय पर उपलब्ध कराना है।
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छत्तीसगढ़ विधानसभा पेपरलेस[/caption]
NeVA के तहत होगा डिजिटाइजेशन, CHiPS को मिली जिम्मेदारी
छत्तीसगढ़ विधानसभा को डिजिटल बनाने की योजना केंद्र सरकार की 'वन नेशन, वन लेजिस्लेटिव प्लेटफॉर्म' की अवधारणा से जुड़ी है। राष्ट्रीय ई-विधान एप्लिकेशन (NeVA) के माध्यम से विधानमंडलों के कामकाज को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
इस परियोजना के तकनीकी क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसाइटी (CHiPS) को जिम्मेदारी दी गई है। संसदीय कार्य मंत्रालय, राज्य शासन और विधानसभा सचिवालय के बीच इस संबंध में समझौता किया गया है।
विभागीय योजना के अनुसार, डिजिटाइजेशन का काम तीन महीने की निर्धारित समयसीमा में पूरा करने का लक्ष्य है। इसके बाद विधानसभा के कामकाज में डिजिटल सुविधाओं का अधिक व्यापक उपयोग किया जा सकेगा।
मोबाइल ऐप पर मिलेगी विधानसभा की कार्यसूची और प्रश्नोत्तर
छत्तीसगढ़ विधानसभा के आधिकारिक मोबाइल ऐप को भी अपडेट करने की तैयारी है। इसका उद्देश्य आम लोगों को सदन की कार्यवाही और विधायी गतिविधियों से जुड़ी जानकारी आसानी से उपलब्ध कराना है।
प्रस्तावित डिजिटल सुविधाओं के तहत मोबाइल ऐप पर सदन की दैनिक कार्यसूची, तारांकित और अतारांकित प्रश्नोत्तर, बजट भाषण तथा लाइव कार्यवाही जैसी जानकारियां उपलब्ध कराने की योजना है।
इससे नागरिकों को विधानसभा की गतिविधियों पर नजर रखने और जनप्रतिनिधियों से जुड़े विधायी कामकाज की जानकारी प्राप्त करने में सुविधा हो सकती है। हालांकि, इन सुविधाओं की उपलब्धता ऐप के अपडेट और परियोजना के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।
नवा रायपुर विधानसभा भवन में डिजिटल सुविधाओं का विस्तार
नवा रायपुर स्थित नए विधानसभा भवन में डिजिटल व्यवस्था के साथ परिसर के अन्य विकास कार्यों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। परिसर के सौंदर्यीकरण, उद्यानों, बैंक्वेट क्षेत्र और राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ की स्थापना से जुड़े कार्यों की निगरानी की जा रही है।
डिजिटल परियोजना पूरी होने के बाद छत्तीसगढ़ विधानसभा का विधायी कामकाज तकनीक आधारित व्यवस्था की ओर आगे बढ़ेगा। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि तीन महीने की निर्धारित समयसीमा में डिजिटाइजेशन का काम कितना पूरा होता है और आगामी बजट सत्र तक कौन-कौन सी डिजिटल सुविधाएं शुरू हो पाती हैं।
छत्तीसगढ़ विधानसभा का पेपरलेस मॉडल: इस पहल का मुख्य उद्देश्य विधायी दस्तावेजों को डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराना, कागजों पर निर्भरता कम करना और विधानसभा की कार्यप्रणाली को अधिक सुलभ बनाना है।
