चारों दिशाओं में बढ़ाई गई निवेश क्षेत्र की सीमाएं, GIS तकनीक से होगी जमीनों की मैपिंग और वर्गीकरण; रिंग रोड का भी होगा प्रावधान
Highlights
- रायगढ़ के नए मास्टर प्लान की अधिसूचना छत्तीसगढ़ राजपत्र में प्रकाशित।
- निवेश क्षेत्र में करीब 43 नए गांव शामिल किए गए।
- उत्तर में काशीचुआं-चिरईपानी और पूर्व में सियारपाली-मिड़मिड़ा तक विस्तार।
- दक्षिण और पश्चिम दिशा में भी बढ़ाई गई सीमाएं।
- GIS आधारित मैपिंग से तय होगा जमीनों का स्वरूप और उपयोग।

रायगढ़ शहर के नए मास्टर प्लान का लंबे समय से चल रहा इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। राज्य सरकार ने नए मास्टर प्लान की अधिसूचना छत्तीसगढ़ राजपत्र में प्रकाशित कर दी है। इसके साथ ही रायगढ़ निवेश क्षेत्र की सीमाओं का चारों दिशाओं में विस्तार किया गया है और करीब 43 नए गांवों को इसमें शामिल किया गया है।
नई व्यवस्था के बाद रायगढ़ शहर के आसपास का बड़ा ग्रामीण क्षेत्र भी सुनियोजित विकास के दायरे में आएगा। शहर के आसपास तेजी से आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। कई गांवों में जमीनों का स्वरूप बदल रहा है और कारोबारी निवेश भी हो चुका है। ऐसे में भविष्य के विकास को व्यवस्थित करने के लिए नए मास्टर प्लान की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
2011 के मास्टर प्लान से आगे बढ़ा दायरा
रायगढ़ का पिछला मास्टर प्लान वर्ष 2011 का था। इसमें 46 गांवों को शामिल किया गया था। इनमें मिट्ठूमुड़ा, बांजीपाली, छोटे अतरमुड़ा, कौहाकुंडा, उर्दना, किशनपुर, कलमी, कोसमनारा, अमलीभौना, सांगीतराई, ननसिया, पटेलपाली, लामीदरहा, भेलवा-टिकरा, छातामुड़ा, दर्रामुड़ा, डुमरपाली, कोंड़ातराई और गढ़उमरिया जैसे गांव शामिल थे।
हालांकि, पुराने मास्टर प्लान में शामिल कई गांवों में अपेक्षित बदलाव और नियोजित विकास नहीं हो पाया। इसके बाद वर्ष 2021 में नया मास्टर प्लान लागू करने की योजना थी। उस समय 11 नए गांवों को शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। अब इस दायरे में 32 और गांव जोड़े गए हैं। इस तरह नए निवेश क्षेत्र में करीब 43 गांव शामिल किए गए हैं।

चारों दिशाओं में बढ़ाई गई निवेश क्षेत्र की सीमाएं
नई अधिसूचना में रायगढ़ निवेश क्षेत्र की सीमाओं का विस्तार करते हुए उत्तर, पूर्व, दक्षिण और पश्चिम दिशा में नए गांवों को शामिल किया गया है।
उत्तर दिशा: काशीचुआं, उच्चभिट्ठी, मुरालीपाली, परसदा, चिरईपानी, खैरपुर, किशनपुर, जगतपुर, बड़े रामपुर, उर्दना, भेलवाटिकरा और रेगड़ा की उत्तरी सीमा तक।
पूर्व दिशा: रेगड़ा, लामीदरहा, गोवर्धनपुर, बोईरदादर, बिजेपुर, टारपाली, पतरापाली, सियारपाली, कोटरापाली, जुर्डा, पंडरीपानी, बेंद्राचुआं, बड़े अतरमुड़ा, नवापाली, बोईरडीह, डूमरमुड़ा, मिड़मिड़ा, झलमला और बिंजकोट की पूर्वी सीमा तक।
दक्षिण दिशा: बिंजकोट, झलमला, मल्दा, आमापाली, जकेला, कोंड़ातराई, सुर्री, जामपाली, कर्राजोर, सारसमाल और तेतला की दक्षिणी सीमा तक।
पश्चिम दिशा: तेतला, लोहरसिंग, बिजना, जोगीतराई, तरकेला, बनसिया, धनागर, कुसमुरा, बघनपुर, रामपुर छोटे, गेजामुड़ा और काशीचुआं की पश्चिमी सीमा तक।
GIS तकनीक से होगी जमीनों की मैपिंग
नया मास्टर प्लान GIS (जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम) आधारित होगा। इसके लिए नई दिल्ली की निजी कंपनी डीडीएफ को काम सौंपा गया था। इस तकनीक के माध्यम से निवेश क्षेत्र की वास्तविक मैपिंग की जाएगी। अधिसूचना के प्रकाशन के बाद भूमि का सर्वे और वर्गीकरण किया जाएगा।
इस प्रक्रिया में जमीनों के उपयोग और भविष्य के विकास की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए नियोजन किया जाएगा। इससे आवासीय, व्यावसायिक और अन्य विकास गतिविधियों को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।
रिंग रोड और सड़कों के हिसाब से तय होगा विकास
नए मास्टर प्लान में रिंग रोड का भी प्रावधान शामिल किए जाने की बात कही गई है। सड़कों की स्थिति और प्रस्तावित मार्गों के आधार पर जमीनों का स्वरूप निर्धारित होगा। इससे शहर के विस्तार के साथ यातायात और आवागमन की जरूरतों को भी ध्यान में रखकर योजना तैयार की जा सकेगी।
करीब 43 गांवों के जुड़ने से रायगढ़ का निवेश क्षेत्र पहले की तुलना में काफी विस्तृत हो जाएगा। अब भूमि सर्वे, वर्गीकरण और GIS मैपिंग के बाद यह स्पष्ट होगा कि अलग-अलग क्षेत्रों में किस तरह का विकास प्रस्तावित किया जाएगा।













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