सुबह 9 से दोपहर 1 बजे और शाम 4 से 6 बजे तक होगी ओपीडी, बच्चों के इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज और MCH जाने की परेशानी होगी कम

Highlights
- रायगढ़ जिला अस्पताल में जल्द शुरू होगी शिशु रोग ओपीडी।
- बच्चों के इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर रहेंगे उपलब्ध।
- दो पालियों में मरीजों को मिलेगा परामर्श और उपचार।
- सुबह 9 से दोपहर 1 और शाम 4 से 6 बजे तक रहेगी सेवा।
- स्थानीय स्तर पर बच्चों को विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा मिलने की उम्मीद।
पूरी खबर
रायगढ़ के जिला अस्पताल में बच्चों के इलाज की सुविधा को बेहतर बनाने की तैयारी की जा रही है। अस्पताल में जल्द ही शिशु रोग ओपीडी सेवा शुरू की जाएगी। इसके तहत बच्चों के उपचार के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर दो पालियों में उपलब्ध रहेंगे। इस सुविधा के शुरू होने से अभिभावकों को बच्चों के इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज या मातृ एवं शिशु अस्पताल (MCH) तक जाने की परेशानी से राहत मिलने की उम्मीद है।
दो पालियों में उपलब्ध रहेंगे शिशु रोग विशेषज्ञ
जिला अस्पताल में शिशु रोग से संबंधित स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। इसी कड़ी में बच्चों के लिए अलग ओपीडी सेवा शुरू करने का निर्णय लिया गया है। निर्धारित समय के अनुसार, पहली पाली में सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक और दूसरी पाली में शाम 4 बजे से 6 बजे तक शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अपनी सेवाएं देंगे।
इस दौरान बच्चों को विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श और उपचार मिल सकेगा। अभिभावक अपनी सुविधा के अनुसार निर्धारित समय पर बच्चों को जिला अस्पताल लेकर पहुंच सकेंगे।
मेडिकल कॉलेज और MCH जाने की परेशानी होगी कम
गौरतलब है कि रायगढ़ में मेडिकल कॉलेज और MCH की दूरी अधिक होने के कारण कई अभिभावकों को बच्चों के इलाज के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। जिला अस्पताल में नियमित शिशु रोग विशेषज्ञ ओपीडी की सुविधा नहीं होने से भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता था।
ऐसे में जिला अस्पताल में शिशु रोग ओपीडी शुरू करने का निर्णय स्थानीय लोगों के लिए राहत भरा माना जा रहा है। अब उन्हें बच्चों के सामान्य उपचार और विशेषज्ञ परामर्श के लिए स्थानीय स्तर पर ही सरकारी अस्पताल में सुविधा मिल सकेगी।
गरीब और जरूरतमंद परिवारों को मिलेगा लाभ
जिला अस्पताल में शिशु रोग ओपीडी शुरू होने से बच्चों के उपचार की सरकारी व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है। खासकर गरीब और जरूरतमंद परिवारों को इसका लाभ मिल सकता है। उन्हें विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाओं के लिए दूसरे अस्पतालों तक जाने की जरूरत कम पड़ेगी।













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