रायपुर। शहरों में कचरे के ढेर में फेंकी जाने वाली पॉलीथिन, प्लास्टिक बैग और पैकेजिंग सामग्री का इस्तेमाल अब सड़क निर्माण में किया जाएगा। प्लास्टिक कचरे के निस्तारण और उसके उपयोग को बढ़ावा देने के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने प्रदेश के सभी नगरीय निकायों को निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत नगर निगमों और नगर पालिकाओं को सड़क निर्माण ठेकेदारों के साथ अनुबंध करना होगा। इस पहल से प्लास्टिक कचरे की समस्या कम करने के साथ सड़क निर्माण में उसके उपयोग को बढ़ावा देने की योजना है।

मुख्य बातें
- प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल सड़क निर्माण में किया जाएगा।
- नगरीय निकायों को सड़क ठेकेदारों के साथ एमओयू करना होगा।
- एमआरएफ केंद्रों में प्लास्टिक की छंटाई, सफाई और ग्रेडिंग होगी।
- सड़क निर्माण और नवीनीकरण के टेंडर में प्लास्टिक उपयोग की शर्त शामिल होगी।
- प्लास्टिक की मात्रा, गुणवत्ता, परिवहन और भुगतान की शर्तें अनुबंध में तय होंगी।
- निर्देशों के पालन में लापरवाही पर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
कचरे से सड़क बनाने की प्रक्रिया तय
नगरीय निकायों को घरों से कैरी बैग, पैकेजिंग फिल्म, रैपर और पॉलीथिन जैसे प्लास्टिक कचरे को एकत्र करने की व्यवस्था करनी होगी। इसके बाद ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के तहत संचालित मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) केंद्रों में प्लास्टिक की छंटाई, सफाई, सुखाने और ग्रेडिंग की जाएगी।
तैयार ग्रेडेड प्लास्टिक को सड़क निर्माण ठेकेदारों को उपलब्ध कराया जाएगा। इससे शहरों में प्लास्टिक कचरे के निस्तारण में मदद मिलेगी और सड़क निर्माण में पुनर्चक्रित सामग्री के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा।
भारतीय सड़क कांग्रेस के मानकों के अनुसार होगा उपयोग
निर्देशों में भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के मानकों के अनुसार सड़क निर्माण में प्लास्टिक के उपयोग का उल्लेख किया गया है। दिए गए विवरण के मुताबिक, डामर मिश्रण में बिटुमेन के वजन के आधार पर आठ प्रतिशत तक प्लास्टिक कचरा मिलाया जा सकता है।
ड्राई प्रोसेस के तहत प्लास्टिक को डामर मिश्रण में शामिल किया जाता है। उपलब्ध तकनीकी निष्कर्षों के अनुसार, निर्धारित प्रक्रिया और मानकों का पालन करने पर इससे बनी सड़कें पारंपरिक मिश्रण से बनी सड़कों के समान मजबूती और टिकाऊपन हासिल कर सकती हैं। प्लास्टिक के उपयोग से पानी के कारण होने वाले नुकसान को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
सड़क ठेकेदारों के साथ एमओयू करेंगे नगरीय निकाय
नगरीय निकायों को अपने क्षेत्र में उपलब्ध प्लास्टिक कचरे और हर तीन महीने में तैयार होने वाले ग्रेडेड प्लास्टिक का रिकॉर्ड रखना होगा। इसके साथ ही लोक निर्माण विभाग (PWD), सड़क विकास निगम, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े सड़क निर्माण ठेकेदारों की सूची तैयार करनी होगी।
संबंधित विभागों से जानकारी जुटाने के बाद ठेकेदारों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) किया जाएगा। इसमें प्लास्टिक की आपूर्ति, गुणवत्ता, दर, परिवहन और भुगतान से जुड़ी शर्तें निर्धारित होंगी।

एमओयू में तय होगी प्लास्टिक की मात्रा और गुणवत्ता
समझौते में यह स्पष्ट किया जाएगा कि नगरीय निकाय कितनी मात्रा में ग्रेडेड प्लास्टिक उपलब्ध कराएगा। साथ ही प्लास्टिक की गुणवत्ता, परिवहन की जिम्मेदारी और भुगतान की प्रक्रिया भी तय होगी।
निकायों को प्रत्येक तिमाही में तैयार किए गए प्लास्टिक की मात्रा का विवरण राज्य स्तर पर भेजना होगा। इससे यह आकलन करने में मदद मिलेगी कि अलग-अलग शहरों में कितना प्लास्टिक कचरा सड़क निर्माण में इस्तेमाल किया जा रहा है।
सड़क निर्माण के टेंडर में भी होगी अनिवार्य शर्त
नगरीय निकायों की ओर से जारी सड़क निर्माण और नवीनीकरण के टेंडर में प्लास्टिक के उपयोग से संबंधित शर्त शामिल की जाएगी। इसके तहत निर्माण कार्य के लिए ग्रेडेड प्लास्टिक निकायों के एमआरएफ केंद्रों से लेने की व्यवस्था होगी।
इस कदम से सड़क निर्माण में प्लास्टिक कचरे की नियमित खपत का रास्ता तैयार होगा। साथ ही, कचरे के बेहतर प्रबंधन और पुनर्चक्रण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
स्वच्छ भारत मिशन को मिलेगा बढ़ावा
प्लास्टिक कचरे का सड़क निर्माण में उपयोग होने से खुले में फेंके जाने वाले प्लास्टिक की मात्रा कम करने में मदद मिल सकती है। इससे नगरीय निकायों के कचरा प्रबंधन तंत्र को मजबूत करने और संसाधनों के पुनः उपयोग को बढ़ावा देने का अवसर मिलेगा।
विभाग ने निर्देशों के पालन में लापरवाही होने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की चेतावनी भी दी है। अब इस व्यवस्था को लागू करने में नगरीय निकायों की तैयारी और ठेकेदारों के साथ होने वाले अनुबंध अहम होंगे।
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