रायपुर। माओवादी हिंसा से मुक्त हो चुके बस्तर के दूरस्थ और दुर्गम इलाकों को सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने बस्तर संभाग के सभी पात्र गांवों और बसाहटों का शत-प्रतिशत सर्वे कराने का निर्णय लिया है, ताकि कोई भी पात्र बसाहट सड़क संपर्क से वंचित न रहे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह ने अधिकारियों को माओवादी हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों में सड़क निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के पहले चरण के शेष कार्य छह महीने में पूरे करने को कहा गया है।
मुख्य बातें
- बस्तर के सभी पात्र गांवों और बसाहटों का होगा 100% सर्वे।
- PMGSY के पहले चरण के बाकी काम छह महीने में पूरे करने के निर्देश।
- पीएम जनमन योजना के तहत मार्च 2027 तक 828 किमी सड़क निर्माण का लक्ष्य।
- सड़क निर्माण में देरी और लापरवाही पर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई।
- ग्रामीण सड़कों को भारी वाहनों से बचाने के लिए CCTV कैमरे लगाने के निर्देश।
- सड़क निर्माण में प्लास्टिक के उपयोग और महिला स्व-सहायता समूहों की भागीदारी पर जोर।

बस्तर के दूरस्थ गांवों तक सड़क पहुंचाने की तैयारी
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बस्तर संभाग के सभी पात्र गांवों और बसाहटों का सर्वे कराया जाए। इसका उद्देश्य दूरस्थ और दुर्गम इलाकों तक सड़क संपर्क सुनिश्चित करना है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी पात्र बसाहट सड़क सुविधा से वंचित नहीं रहनी चाहिए। माओवादी हिंसा से प्रभावित रहे क्षेत्रों में सड़क निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए स्वीकृत कार्यों को तेजी से पूरा करने पर जोर दिया गया है।
छह महीने में पूरा करना होगा PMGSY का शेष काम
रायपुर स्थित विकास भवन में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) और मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के कार्यों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में सड़क निर्माण की प्रगति, गुणवत्ता और निर्धारित समयसीमा की समीक्षा की गई।
सचिव भीम सिंह ने PMGSY के पहले चरण के शेष कार्य छह महीने के भीतर पूरे करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने योजना के क्रियान्वयन में देश में बेहतर प्रदर्शन किया है। इस उपलब्धि को बनाए रखने के लिए नियमित निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण जरूरी है।
अधिकारियों को फील्ड में जाकर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जांचने और समय पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए भी कहा गया।
पीएम जनमन योजना के तहत 828 किमी सड़क का लक्ष्य
विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) की बसाहटों को सड़क संपर्क से जोड़ने के लिए संचालित पीएम जनमन योजना के तहत मार्च 2027 तक 828 किलोमीटर सड़क निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
सचिव ने इस लक्ष्य को समय पर पूरा करने के लिए कार्ययोजना तैयार करने और सभी स्वीकृत कार्य निर्धारित समय से पहले पूरे करने के निर्देश दिए। इसके अलावा माओवादी हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों में विशेष केंद्रीय सहायता से स्वीकृत सड़कों का निर्माण भी जल्द पूरा करने पर जोर दिया गया।
लापरवाही पर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई
सड़क निर्माण कार्यों में देरी और लापरवाही को लेकर समीक्षा बैठक में सख्त रुख अपनाया गया। जानकारी के अनुसार, कवर्धा में निर्माण कार्यों की धीमी प्रगति के मामले में तत्कालीन कार्यपालन अभियंता के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
वहीं, बलरामपुर जिले के राजपुर में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने में लापरवाही के मामले में संबंधित उप अभियंता को निलंबित कर जांच कराने के निर्देश दिए गए।
इन निर्देशों का उद्देश्य निर्माण कार्यों में जवाबदेही तय करना और स्वीकृत परियोजनाओं को समयसीमा के भीतर पूरा कराना है।
भारी वाहनों से सड़कों को बचाने के लिए लगेंगे CCTV
ग्रामीण सड़कों को भारी वाहनों से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए भी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत जरूरत के अनुसार CCTV कैमरे लगाने और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ चालानी कार्रवाई करने को कहा गया है।
इसके अलावा सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाले बिटुमेन की अग्रिम व्यवस्था, लंबित भुगतान का निराकरण और सड़कों का समय पर रखरखाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

सड़क निर्माण में प्लास्टिक और महिला समूहों की भागीदारी
सड़क निर्माण में प्लास्टिक के उपयोग को बढ़ावा देने और उसके संग्रहण में महिला स्व-सहायता समूहों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। इससे प्लास्टिक कचरे के बेहतर प्रबंधन के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में महिला समूहों के लिए काम के अवसर बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
बैठक में प्रमुख अभियंता केके कटारे, राज्य गुणवत्ता समन्वयक अमित गुलहरे और मुख्य अभियंता एमएमजीएसवाई वरुण राजपूत सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।













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