रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोल लेवी मामले की जांच में एक और अहम जानकारी सामने आई है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो यानी **EOW की पूरक चार्जशीट** में कवि डॉ. कुमार विश्वास के एक कार्यक्रम का जिक्र किया गया है। चार्जशीट में कार्यक्रम के लिए **25 लाख रुपये की व्यवस्था** किए जाने से जुड़ी बातचीत का उल्लेख है।
जांच एजेंसी की ओर से सामने आई जानकारी के मुताबिक, **5 अप्रैल 2022 को कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी के बीच हुई कथित WhatsApp बातचीत** में कुमार विश्वास के कार्यक्रम के लिए 25 लाख रुपये की व्यवस्था किए जाने की बात का उल्लेख है। यह जानकारी चार्जशीट की समरी में दर्ज होने की बात सामने आई है।
### क्या था कार्यक्रम?
मामला साल 2022 में **खैरागढ़ विधानसभा उपचुनाव** के दौरान रामनवमी के अवसर पर आयोजित **‘हमर भांचा राम’** कार्यक्रम से जुड़ा बताया जा रहा है। इस कार्यक्रम में कुमार विश्वास ने प्रस्तुति दी थी। चार्जशीट में दावा किया गया है कि कार्यक्रम से जुड़े भुगतान के लिए 25 लाख रुपये की व्यवस्था की बात आरोपियों के बीच हुई बातचीत में सामने आई।
### कोल लेवी से क्या है कनेक्शन?
जांच एजेंसी के अनुसार, कोल लेवी मामले में कथित तौर पर अवैध तरीके से जुटाई गई रकम के इस्तेमाल और उसके लेन-देन की जांच की जा रही है। इसी जांच के दौरान WhatsApp चैट, डायरी और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का उल्लेख चार्जशीट में किया गया है। कुमार विश्वास के कार्यक्रम के लिए 25 लाख रुपये की व्यवस्था से जुड़ी बातचीत भी इसी जांच सामग्री का हिस्सा बताई जा रही है।
रिपोर्टों के मुताबिक, EOW ने इस मामले में **9 हजार से अधिक पन्नों का पूरक चालान** पेश किया है, जिसमें कई लेन-देन और कथित नेटवर्क से जुड़े दस्तावेजों का विवरण शामिल है।
### महत्वपूर्ण बात
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि **चार्जशीट में किसी व्यक्ति के नाम या उसके कार्यक्रम से जुड़े भुगतान का उल्लेख होना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता।** उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार कुमार विश्वास को इस मामले में आरोपी नहीं बनाया गया है। भुगतान की वास्तविक प्रकृति, उसका स्रोत और उससे जुड़े आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया में ही तय होगा।
यानी, फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि **25 लाख रुपये की यह रकम कहां से आई, किसके जरिए दी गई और क्या इसका संबंध कथित कोल लेवी की रकम से था?** जांच और अदालत की प्रक्रिया में इन सवालों के जवाब सामने आना बाकी है।
