रायपुर लौटते ही भूपेश बघेल का भाजपा पर हमला, रामलीला मैदान की रैली को बताया ऐतिहासिक

महादेव सट्टा ऐप जांच, अमित शाह के छत्तीसगढ़ दौरे और राज्योत्सव में छत्तीसगढ़ महतारी के अपमान को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार पर उठाए सवाल

Highlights

  • भूपेश बघेल ने रामलीला मैदान की रैली को ऐतिहासिक बताया।
  • मतदाता सूची से नाम काटे जाने के मुद्दे पर चुनाव आयोग को घेरा।
  • महादेव सट्टा ऐप मामले में ईडी और सीबीआई की जांच पर सवाल उठाए।
  • अमित शाह के छत्तीसगढ़ दौरे को लेकर भी साधा निशाना।
  • राज्योत्सव में छत्तीसगढ़ महतारी के अपमान और खाद्य विभाग के आदेश पर भाजपा को घेरा।

रायपुर पहुंचते ही भाजपा सरकार पर बरसे भूपेश बघेल

दिल्ली के रामलीला मैदान में दो दिनों तक चले प्रदर्शन के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल रायपुर लौट आए हैं। राजधानी पहुंचने पर उन्होंने रामलीला मैदान की रैली, महादेव सट्टा ऐप मामले, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के छत्तीसगढ़ दौरे और राज्योत्सव में छत्तीसगढ़ महतारी के अपमान को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। इस दौरान उन्होंने केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर कई सवाल उठाए।

रामलीला मैदान की रैली को बताया ऐतिहासिक

भूपेश बघेल ने कहा कि रामलीला मैदान में लगातार दो दिनों तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन हुआ, जिसे पूरे देश ने देखा। उन्होंने रविवार की रैली को ऐतिहासिक बताते हुए दावा किया कि इसमें 1974 और 1994 में हुई रैलियों से भी अधिक लोग शामिल हुए थे।

उन्होंने राहुल गांधी के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि यह चुनाव आयोग के लिए सीधी चुनौती है। बघेल ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए गए हैं। उनके मुताबिक, छह राज्यों में 13 करोड़ लोगों के नाम काटे जाने का आंकड़ा सामने आया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश की आबादी बढ़ रही है, तो मतदाताओं की संख्या कैसे घट रही है?

रैली में कम भीड़ दिखाई देने संबंधी खबरों पर भी उन्होंने आपत्ति जताई। बघेल ने कहा कि बारिश के कारण मैदान के कुछ हिस्सों में कीचड़ था और उसी खाली हिस्से की तस्वीरें दिखाकर भीड़ कम होने का दावा किया गया।

महादेव सट्टा ऐप मामले में जांच पर उठाए सवाल

महादेव सट्टा ऐप मामले में सौरभ चंद्राकर की रिमांड को लेकर भी भूपेश बघेल ने जांच एजेंसियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जांच आगे बढ़ने पर कई और नाम सामने आ सकते हैं। बघेल के मुताबिक, उनकी सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2022 में इस मामले में 72 एफआईआर दर्ज की गई थीं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी सरकार ने सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी करने के लिए गृह मंत्रालय को पत्र लिखा था।

पूर्व मुख्यमंत्री ने ईडी द्वारा जारी शुभम सोनी के वीडियो का हवाला देते हुए सवाल किया कि महादेव सट्टा ऐप का असली मालिक कौन है? उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि मामले में शुभम सोनी की क्या भूमिका है और सौरभ चंद्राकर की क्या भूमिका है। बघेल ने आरोप लगाया कि ईडी और सीबीआई सरकार के दबाव में काम करती हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा है।

अमित शाह के दौरे पर भी साधा निशाना

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के छत्तीसगढ़ दौरे को लेकर भी भूपेश बघेल ने टिप्पणी की। सौरभ चंद्राकर को भारत लाए जाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि उसे केंद्रीय एजेंसियों ने खोजकर गिरफ्तार नहीं किया, बल्कि वह पहले से ओमान की जेल में था और उसे प्रत्यर्पण के जरिए भारत लाया गया है।

छत्तीसगढ़ महतारी के अपमान का लगाया आरोप

राज्योत्सव में छत्तीसगढ़ महतारी के कथित अपमान को लेकर भूपेश बघेल ने प्रदेश सरकार और भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा को छत्तीसगढ़ और यहां के लोगों से कोई लगाव नहीं है।

बघेल ने कहा कि चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रमों में छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीर लगाई गई थी, लेकिन सरकार बनने के बाद प्रदेश की संस्कृति और पहचान को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकता छत्तीसगढ़ की खदानों पर है।

राज्योत्सव में कर्मचारियों की अनिवार्य उपस्थिति पर भी सवाल

रायपुर जिले के खाद्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को राज्योत्सव में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के आदेश पर भी भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया के जरिए प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने पोस्ट में भाजपा पर तंज कसते हुए लिखा कि रामलीला मैदान में जुटी भीड़ की गिनती को लेकर भाजपा और उससे जुड़े लोग परेशान थे, अब उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भीड़ दिखानी है। बघेल के इस बयान के बाद राज्योत्सव में कर्मचारियों की अनिवार्य उपस्थिति का मुद्दा भी राजनीतिक चर्चा में आ गया है।

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