राजनांदगांव में कर्मचारी फेडरेशन की मांग, 2% महंगाई भत्ता एरियर सहित देने की मांग

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कैशलेस चिकित्सा सुविधा तत्काल लागू करने की उठाई आवाज, 32 कर्मचारी-अधिकारी संगठनों के पदाधिकारियों ने बैठक में बनाई रणनीति

राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ में महंगाई के बीच कर्मचारी-अधिकारियों ने राज्य सरकार से महंगाई भत्ता और कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने की मांग उठाई है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने जनवरी 2026 से दो प्रतिशत महंगाई भत्ता देय तिथि से एरियर सहित प्रदान करने और कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ तत्काल देने की मांग की है। फेडरेशन ने चेतावनी दी है कि मांगों का जल्द निराकरण नहीं होने पर आगामी दिनों में आंदोलन किया जाएगा।

32 संगठनों के पदाधिकारी बैठक में हुए शामिल

कर्मचारियों की विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन, राजनांदगांव की बैठक भारत स्काउट जिला कार्यालय भवन में आयोजित की गई। स्टेट स्कूल के पास स्थित कार्यालय में हुई इस बैठक में जिले के 32 कर्मचारी-अधिकारी संगठनों के जिला अध्यक्ष और पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में कर्मचारियों के हितों से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई और शासन से शीघ्र निर्णय लेने की मांग की गई।

महंगाई भत्ते का एरियर देने की मांग

बैठक में पदाधिकारियों ने जनवरी 2026 से दो प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ाकर देने तथा इसका भुगतान देय तिथि से एरियर सहित करने पर जोर दिया। फेडरेशन का कहना है कि महंगाई के दौर में कर्मचारियों को आर्थिक राहत देने के लिए महंगाई भत्ते से जुड़ी मांग पर जल्द निर्णय लिया जाना चाहिए।

कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने पर जोर

फेडरेशन ने राज्य के कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा तत्काल लागू करने की मांग भी उठाई। पदाधिकारियों के अनुसार, इस सुविधा से कर्मचारियों और उनके परिवारों को इलाज के दौरान आर्थिक राहत मिल सकेगी। बैठक में कर्मचारियों की समस्याओं को शासन तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने और मांगों के निराकरण के लिए आगे की रणनीति पर भी चर्चा की गई।

मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी

छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों की जायज मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आंदोलन किया जाएगा। फेडरेशन ने कहा कि मांगों की अनदेखी जारी रहने पर आंदोलन की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी। अब कर्मचारियों की इन मांगों पर शासन के निर्णय का इंतजार है।

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