मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन 2026 के तहत गांवों और जनजातीय क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं की होगी पहचान, आधुनिक प्रशिक्षण, स्पोर्ट्स साइंस और मुख्यमंत्री ट्रॉफी से खिलाड़ियों को मिलेंगे अवसर।

छत्तीसगढ़। प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन 2026 के तहत खेल प्रशिक्षण और प्रतिभा खोज की व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित समीक्षा बैठक में गांवों, जनजातीय क्षेत्रों और दूरस्थ अंचलों के खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और प्रतियोगिताओं के अवसर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। बैठक में बिलासपुर स्पोर्ट्स एक्सीलेंस सेंटर में आवासीय खिलाड़ियों की क्षमता 165 से बढ़ाकर 300 करने की योजना की भी समीक्षा की गई।
मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन 2026 का उद्देश्य
मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन का उद्देश्य प्रदेश में खेल प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें व्यवस्थित प्रशिक्षण और आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों में भी अनेक प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद हैं। सही समय पर प्रशिक्षण, संसाधन और विशेषज्ञ मार्गदर्शन मिलने से वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने ज्ञानेश्वरी यादव और संजू देवी जैसी खिलाड़ियों का उल्लेख करते हुए कम उम्र से प्रतिभाओं की पहचान और उन्हें लगातार प्रशिक्षण देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
गांवों और जनजातीय क्षेत्रों में चलेगा टैलेंट हंट
मिशन के तहत खेल प्रतिभाओं की खोज बड़े शहरों और खेल अकादमियों तक सीमित नहीं रहेगी। ग्रामीण, जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों में भी बच्चों और युवाओं की खेल क्षमता पहचानने पर जोर दिया जाएगा। तीरंदाजी, कबड्डी सहित विभिन्न खेलों में रुचि रखने वाले खिलाड़ियों को उनकी क्षमता के अनुसार प्रशिक्षण से जोड़ने की योजना है।
इस पहल का उद्देश्य संसाधनों और अवसरों की कमी के कारण प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की प्रगति में आने वाली बाधाओं को कम करना है। जमीनी स्तर पर खेल गतिविधियों को प्रोत्साहित कर बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को उच्चस्तरीय प्रशिक्षण तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।
स्कूलों से तैयार होंगे भविष्य के खिलाड़ी
मुख्यमंत्री ने स्कूल स्तर से ही बच्चों को खेल गतिविधियों से जोड़ने के निर्देश दिए। स्कूलों में व्यायाम शिक्षकों के माध्यम से नियमित खेल गतिविधियां संचालित करने और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की पहचान करने पर जोर दिया गया।
स्कूल स्तर पर खिलाड़ियों की क्षमता का पता चलने से उन्हें समय रहते विशेषज्ञ प्रशिक्षण दिया जा सकेगा। इससे बच्चों में शारीरिक फिटनेस, अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और टीम भावना विकसित करने में भी मदद मिलेगी।
फीडर सेंटर से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तक प्रशिक्षण
मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के तहत एथलेटिक्स, तीरंदाजी, हॉकी, मुक्केबाजी, कुश्ती, भारोत्तोलन, तैराकी, बैडमिंटन, जूडो और कबड्डी सहित विभिन्न खेलों को प्राथमिकता देने पर चर्चा हुई।
प्रस्तावित व्यवस्था में फीडर सेंटर, उच्च प्रदर्शन प्रशिक्षण केंद्र और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की अहम भूमिका होगी। फीडर सेंटरों में शुरुआती स्तर के खिलाड़ियों की पहचान कर उन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा। बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को खेल अकादमियों और उच्चस्तरीय प्रशिक्षण केंद्रों से जोड़ने की योजना है। साथ ही खिलाड़ियों के प्रदर्शन और प्रगति की नियमित निगरानी पर भी जोर दिया गया।
बिलासपुर स्पोर्ट्स एक्सीलेंस सेंटर की क्षमता बढ़ाने की योजना
बैठक में बिलासपुर स्थित स्पोर्ट्स एक्सीलेंस सेंटर के विस्तार की योजना की समीक्षा की गई। यहां आवासीय खिलाड़ियों की क्षमता वर्तमान 165 से बढ़ाकर 300 करने और संचालित खेल विधाओं का विस्तार करने की योजना है।
इसके साथ ही प्रदेश में पहले से मौजूद स्टेडियमों, खेल मैदानों और प्रशिक्षण केंद्रों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। आवश्यकतानुसार खेल अधोसंरचनाओं का उन्नयन और नियमित रखरखाव करने पर भी जोर दिया गया, ताकि खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
आधुनिक स्पोर्ट्स साइंस और प्रशिक्षित कोचों पर फोकस
खिलाड़ियों के प्रदर्शन में सुधार के लिए आधुनिक स्पोर्ट्स साइंस सुविधाओं को प्रशिक्षण व्यवस्था से जोड़ने की योजना है। इसमें पोषण, स्वास्थ्य परीक्षण, फिटनेस, मनोवैज्ञानिक सहयोग, चोटों से बचाव और पुनर्वास जैसी सुविधाएं शामिल होंगी।
मुख्यमंत्री ने खेलवार प्रशिक्षित और योग्य कोचों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। जिन क्षेत्रों में किसी खेल की अधिक संभावनाएं हैं, वहां उसी के अनुरूप विशेषज्ञ प्रशिक्षकों और जरूरी संसाधनों की व्यवस्था करने की बात कही गई।
मुख्यमंत्री ट्रॉफी से मिलेगा खिलाड़ियों को मंच
मिशन के तहत टैलेंट हंट और मुख्यमंत्री ट्रॉफी के माध्यम से विकासखंड, जिला और राज्य स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित करने की प्रस्तावित व्यवस्था पर चर्चा हुई। इन प्रतियोगिताओं से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।
प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों की पहचान कर उन्हें उच्चस्तरीय प्रशिक्षण और आगे की प्रतियोगिताओं में भागीदारी के अवसर उपलब्ध कराने की योजना है। इससे जमीनी स्तर पर खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का मंच मिल सकेगा।
महिला और दिव्यांग खिलाड़ियों को भी मिलेगा प्रोत्साहन
मुख्यमंत्री ने महिला खिलाड़ियों और दिव्यांग खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए। बैठक में महिला खिलाड़ियों के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर, पैरा स्पोर्ट्स के विकास और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के अनुरूप तैयार करने की योजनाओं पर चर्चा हुई।
खिलाड़ियों को सुरक्षित वातावरण, बेहतर प्रशिक्षण और पर्याप्त प्रतिस्पर्धात्मक अवसर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।
पांच वर्षों की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आगामी पांच वर्षों की स्पष्ट और परिणामोन्मुख कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। इसके लिए खेल एवं युवा कल्याण विभाग के साथ स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य, नगरीय प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया।
मिशन के तहत प्रतिभा की पहचान से लेकर प्रशिक्षण, पोषण, खेल विज्ञान और उच्चस्तरीय प्रतियोगिताओं तक खिलाड़ियों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित करने की योजना है। बिलासपुर स्पोर्ट्स एक्सीलेंस सेंटर की क्षमता बढ़ाने, टैलेंट हंट और आधुनिक प्रशिक्षण जैसी प्रस्तावित पहलों के जरिए प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जा रहा है।
