‘लईका चिन्हारी’ ऐप से होगी स्कूल से बाहर बच्चों की पहचान, रायगढ़ से भी हुए प्रतिभागी शामिल

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निमोरा में 33 जिलों के प्रतिनिधियों को दिया गया व्यावहारिक प्रशिक्षण, अब जिलों और विकासखंडों में मास्टर ट्रेनर्स सिखाएंगे ऐप का उपयोग

रायगढ़। प्रदेश में शाला त्यागी, अप्रवेशी और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान कर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से तैयार किए गए ‘लईका चिन्हारी’ मोबाइल ऐप का राज्य स्तरीय व्यावहारिक प्रशिक्षण 23 अक्टूबर को निमोरा में आयोजित किया गया। ठाकुर प्यारेलाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान में समग्र शिक्षा द्वारा आयोजित इस एक दिवसीय प्रशिक्षण में प्रदेश के सभी 33 जिलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। रायगढ़ जिले से किरण मिश्रा, सहायक कार्यक्रम समन्वयक, समग्र शिक्षा और सुरेंद्र पटेल, व्याख्याता, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बरलिया भी शामिल हुए।

33 जिलों के प्रतिनिधियों ने सीखा ऐप का उपयोग

‘लईका चिन्हारी’ मोबाइल ऐप का उद्देश्य स्कूल से बाहर रह गए बच्चों और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की सही पहचान, पंजीयन और नियमित निगरानी सुनिश्चित करना है। प्रशिक्षण समग्र शिक्षा की आयुक्त किरण कौशल के मार्गदर्शन, अतिरिक्त प्रबंध संचालक के. कुमार के नेतृत्व और उप संचालक आनंद सारस्वत के निर्देशन में संपन्न हुआ। कार्यशाला में सभी जिलों से आए सहायक कार्यक्रम समन्वयक, अप्रवेशी बच्चों के नोडल अधिकारी और तकनीकी रूप से दक्ष जिला संसाधन समूह (DRG) के सदस्यों को ऐप के संचालन की जानकारी दी गई।

मोबाइल पर लाइव डेमो के जरिए दिया प्रशिक्षण

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय अपने मोबाइल फोन पर ऐप चलाने का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया। इसमें प्ले स्टोर से ‘लईका चिन्हारी’ ऐप डाउनलोड करने और सर्वेक्षकों का पंजीयन करने की प्रक्रिया समझाई गई। इसके साथ ही संकुल समन्वयकों (CAC) द्वारा क्लस्टर आईडी के माध्यम से सत्यापन और अप्रूवल देने, ड्रॉप बॉक्स में दर्ज बच्चों की जानकारी खोजने तथा नए बच्चों का विवरण दर्ज करने का अभ्यास कराया गया। बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिलाकर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की प्रक्रिया भी समझाई गई। प्रशिक्षण के प्रशासनिक समन्वय की जिम्मेदारी सहायक संचालक भूपेश फाये और विद्या समीक्षा केंद्र के प्रोजेक्ट मैनेजर राजकिशोर तिवारी ने संभाली। कार्यशाला का संचालन सहायक कार्यक्रम समन्वयक अतुल कुमार अवस्थी और भूपेंद्र धर दीवान ने किया। तकनीकी सत्र में ऐप डेवलपर क्षितिज सेन और दीपक दास महंत ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया, जबकि डेटा एंट्री ऑपरेटर राजकुमार बंजारे ने पंजीयन व्यवस्था संभाली।

अब जिलों और विकासखंडों में प्रशिक्षित होंगे मैदानी कर्मचारी

राज्य स्तर पर प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले मास्टर ट्रेनर्स अब अपने-अपने जिलों में जाकर विकासखंड शिक्षा अधिकारियों (BEO), ब्लॉक रिसोर्स सेंटर समन्वयकों (BRC) और संकुल समन्वयकों (CAC) को ऐप के उपयोग का प्रशिक्षण देंगे। इसके बाद संकुल स्तर पर संस्था प्रमुखों और स्थानीय सर्वेक्षकों, जिनमें साक्षरता प्रेरक, मानदेय कार्यकर्ता और अतिथि शिक्षक शामिल हैं, को ऐप के संचालन की जानकारी दी जाएगी। इससे बच्चों का सर्वेक्षण और पंजीयन समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी तथा तकनीकी समस्याओं को कम करने का प्रयास किया जाएगा।

एक भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे, यही लक्ष्य

कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों ने कहा कि ‘लईका चिन्हारी’ ऐप के माध्यम से स्कूल से बाहर रह गए बच्चों और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान कर उन्हें शिक्षा से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।

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