सुभाष चौक स्थित हनुमानगढ़ी में सर्व गुजराती समाज के तत्वावधान में रास गरबा का आयोजन, आस्था और उल्लास के साथ सांस्कृतिक विरासत को संजो रहे शहरवासी।
रायगढ़। आस्था, परंपरा और उल्लास के संगम के बीच रायगढ़ के सुभाष चौक स्थित हनुमानगढ़ी में नवरात्रि के दौरान रास गरबा की अनूठी छटा देखने को मिल रही है। सर्व गुजराती समाज के तत्वावधान में आयोजित इस गरबा उत्सव में हर दिन बड़ी संख्या में शहरवासी शामिल होकर मां जगदंबे की आराधना कर रहे हैं। करीब 70 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी लोगों को अपनी संस्कृति और धार्मिक आस्था से जोड़ रही है।
मां जगदंबे की आराधना के साथ रास गरबा की धूम
नवरात्रि के पावन अवसर पर हनुमानगढ़ी में मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना के साथ पारंपरिक रास गरबा का आयोजन किया जा रहा है। सर्व गुजराती समाज द्वारा हर साल आयोजित होने वाले इस उत्सव में समाज के लोगों के साथ शहर के बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।
शाम होते ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की चहल-पहल बढ़ने लगती है। मां जगदंबे की आराधना के बीच पारंपरिक रास गरबा का रंग जमता है और पूरा परिसर भक्तिभाव से सराबोर हो उठता है।
सात दशकों से जीवंत है परंपरा
हनुमानगढ़ी में गरबा आयोजन की परंपरा करीब 70 वर्षों से चली आ रही है। गुजराती समाज के लोग पूरे श्रद्धाभाव के साथ इस परंपरा का निर्वहन करते आ रहे हैं। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के साथ रास गरबा के माध्यम से माता के प्रति अपनी आस्था प्रकट की जाती है।
लंबे समय से जारी यह आयोजन रायगढ़ की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। हर वर्ष श्रद्धालुओं की भागीदारी इस परंपरा को जीवंत बनाए हुए है।
धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता का प्रतीक
हनुमानगढ़ी में आयोजित रास गरबा में शहर के अलग-अलग क्षेत्रों से लोग पहुंचते हैं। श्रद्धालु मां जगदंबे के दर्शन करने के साथ पारंपरिक गरबा का आनंद भी लेते हैं।
यह आयोजन केवल धार्मिक उत्सव ही नहीं, बल्कि सामाजिक मेल-मिलाप और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलता है।
सर्व गुजराती समाज के तत्वावधान में आयोजित यह उत्सव आज भी रायगढ़ में आस्था, परंपरा और सामूहिक सहभागिता की पहचान बना हुआ है।