छत्तीसगढ़ में धान खरीदी पर किसानों की नजरें, 1 नवंबर से खरीदी की मांग; बोनस और MSP पर भी उठे सवाल

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की तारीख को लेकर किसानों की उत्सुकता बढ़ गई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में 27 अक्टूबर को होने वाली कैबिनेट बैठक को लेकर किसानों की निगाहें सरकार के फैसलों पर टिकी हैं। किसान संगठन एक नवंबर से धान खरीदी शुरू करने की मांग कर रहे हैं। वहीं, समर्थन मूल्य, बोनस की बकाया राशि और फसल सत्यापन से जुड़ी प्रक्रियाएं भी किसानों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

धान खरीदी केवल कृषि से जुड़ी प्रक्रिया नहीं, बल्कि प्रदेश के लाखों किसानों की आर्थिक जरूरतों से भी जुड़ी है। दीपावली के आसपास किसानों को खेती की लागत चुकाने, मजदूरों का भुगतान करने और परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए पैसों की आवश्यकता होती है। ऐसे में खरीदी की तारीख स्पष्ट होने से किसान अपनी फसल की कटाई, बिक्री और आर्थिक योजना बेहतर तरीके से बना सकेंगे।  

एक नवंबर से धान खरीदी शुरू करने की मांग

छत्तीसगढ़ संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य वेगेंद्र कुमार सोनबेर सहित किसान संगठनों से जुड़े लोगों ने एक नवंबर से धान खरीदी शुरू करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि एक नवंबर को छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस भी होता है। यदि इसी दिन धान खरीदी शुरू करने की परंपरा बनाई जाए, तो किसानों को हर साल खरीदी की तारीख को लेकर होने वाली अनिश्चितता से राहत मिल सकती है। किसानों का तर्क है कि अक्टूबर के अंतिम दिनों तक बड़ी मात्रा में धान पककर तैयार हो जाता है। ऐसे में खरीदी में देरी होने पर किसानों की नकदी संबंधी जरूरतें प्रभावित हो सकती हैं। उन्हें आशंका है कि समय पर सरकारी खरीदी शुरू नहीं होने से कुछ किसान अपनी उपज निजी व्यापारियों को कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर हो सकते हैं। हालांकि, धान खरीदी की तारीख और प्रक्रिया को लेकर अंतिम स्थिति सरकार की आधिकारिक घोषणा से ही स्पष्ट होगी।

धान खरीदी 2026-27: 15 नवंबर की तारीख भी चर्चा में

खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए धान खरीदी 15 नवंबर 2026 से शुरू होने की जानकारी भी मीडिया रिपोर्टों में सामने आई है। ऐसे में एक नवंबर से खरीदी शुरू करने की किसान संगठनों की मांग और प्रस्तावित कार्यक्रम के बीच तारीख को लेकर चर्चा बनी हुई है। किसानों को उम्मीद है कि कैबिनेट बैठक में धान खरीदी नीति और तैयारियों से जुड़े विषयों पर स्थिति स्पष्ट होगी। खरीदी केंद्रों की व्यवस्था, किसानों का पंजीयन, टोकन और फसल सत्यापन जैसे मुद्दे भी इस सीजन में महत्वपूर्ण रहेंगे।

MSP बढ़ाने और बोनस भुगतान की मांग

धान की कीमत को लेकर भी किसान संगठनों की मांगें सामने आई हैं। किसानों के एक वर्ग की मांग है कि समर्थन मूल्य और राज्य सरकार की ओर से दिए जाने वाले अतिरिक्त भुगतान को मिलाकर प्रति क्विंटल 3,358 रुपये की दर सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही पिछली अवधि की बकाया बोनस राशि के भुगतान की मांग भी उठाई जा रही है। यहां स्पष्ट करना जरूरी है कि 3,358 रुपये प्रति क्विंटल की दर किसानों की मांग के रूप में सामने आई है। इसे सरकार द्वारा घोषित नया खरीद मूल्य नहीं माना जाना चाहिए। केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया है। सामान्य धान का MSP 2,441 रुपये और ग्रेड-A धान का MSP 2,461 रुपये प्रति क्विंटल है। < राज्य सरकार की ओर से MSP के अतिरिक्त भुगतान, बोनस या किसी अन्य प्रोत्साहन के संबंध में अंतिम निर्णय और उसकी शर्तें आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होंगी।

पांच साल में बढ़ा धान खरीदी का दायरा

छत्तीसगढ़ में पिछले पांच खरीफ विपणन वर्षों के उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि धान खरीदी का पैमाना बड़े स्तर पर रहा है। किसानों का पंजीयन, सरकारी खरीदी और भुगतान की राशि इस व्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
खरीफ विपणन वर्ष खरीदा गया धान पंजीकृत किसान
2021-22 लगभग 97.97 लाख मीट्रिक टन लगभग 24.05 लाख
2022-23 लगभग 107.53 लाख मीट्रिक टन लगभग 24.98 लाख
2023-24 लगभग 144.92 लाख मीट्रिक टन लगभग 26.85 लाख
2024-25 लगभग 149.25 लाख मीट्रिक टन लगभग 25.49 लाख
2025-26 लगभग 142 लाख मीट्रिक टन लगभग 27.40 लाख
नोट: ये आंकड़े उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित हैं। वर्ष 2025-26 के लिए खरीदी का आंकड़ा 31 जनवरी 2026 तक का बताया गया है।  धान खरीदी की व्यवस्था का प्रभाव केवल किसानों तक सीमित नहीं रहता। इससे ग्रामीण बाजार, कृषि मजदूरी, खाद-बीज की दुकानों और स्थानीय व्यापार में भी नकदी का प्रवाह प्रभावित होता है।

PV एप और भुइंया पोर्टल को लेकर किसानों की परेशानी

आम आदमी पार्टी ने फसल सत्यापन के लिए इस्तेमाल किए जा रहे PV एप और भुइंया वेबसाइट में तकनीकी समस्याओं का मुद्दा उठाया है। पार्टी का कहना है कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में कमजोर इंटरनेट नेटवर्क के कारण डेटा अपलोड और सिंक करने में परेशानी होती है। एप के बार-बार हैंग होने और सटीक जियो-लोकेशन दर्ज करने में दिक्कतों की शिकायतें भी की गई हैं। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया है कि तकनीकी बाधाओं के बावजूद काम पूरा नहीं होने पर पटवारियों को नोटिस और निलंबन जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। इन समस्याओं के विरोध में पटवारी संघ की हड़ताल से फसल सत्यापन का काम प्रभावित होने की बात कही गई है।इन आरोपों और तकनीकी समस्याओं पर संबंधित विभाग का पक्ष मिलने पर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी। किसानों के लिए यह प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि भूमि और फसल संबंधी रिकॉर्ड का सत्यापन धान बिक्री की तैयारी को प्रभावित कर सकता है।

एग्रीस्टैक और किसान पंजीयन को लेकर भी सवाल

धान खरीदी की तैयारियों के बीच एग्रीस्टैक फार्मर आईडी और किसान पंजीयन की प्रक्रिया भी चर्चा में है। संयुक्त खातों में दर्ज सह-खातेदारों के लिए भूमि संबंधी दावों और सहमति सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर किसानों की चिंताएं सामने आई हैं।उपलब्ध जानकारी में दावा किया गया है कि विरोध के बाद एग्रीस्टैक की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। हालांकि, किसानों को पंजीयन के लिए किन दस्तावेजों और प्रक्रियाओं का पालन करना होगा, इसकी पुष्टि नवीनतम आधिकारिक दिशा-निर्देशों से की जानी चाहिए।

कैबिनेट बैठक से किसानों को क्या उम्मीद?

27 अक्टूबर की कैबिनेट बैठक में धान खरीदी की तैयारियों और संबंधित नीतिगत विषयों पर संभावित निर्णयों को लेकर किसानों की नजरें टिकी हैं। किसानों की प्रमुख अपेक्षाएं हैं कि खरीदी की तारीख स्पष्ट हो, उपार्जन केंद्रों पर पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध रहें, पंजीयन और फसल सत्यापन की तकनीकी समस्याओं का समाधान हो तथा बोनस संबंधी मांगों पर सरकार अपना रुख स्पष्ट करे।फिलहाल खरीदी की तारीख में बदलाव, 3,358 रुपये प्रति क्विंटल की दर या बोनस भुगतान को लेकर किसी नए निर्णय की पुष्टि उपलब्ध नहीं है। किसानों को सरकार की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

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