सारंगढ़ उपजेल में बंदियों की पिटाई और आनलाइन उगाही के मामले में बुधवार को डीजी जेल ने शपथ पत्र के साथ जवाब पेश किया है। जवाब का अध्ययन करने के बाद हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच ने कहा कि यह साफ हो गया है कि बंदियों की स्थिति ठीक नहीं है। पूरे मामले की जांच और दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई का निर्देश दिया है। कार्रवाई के बाद पूरे मामले से डीजी जेल को अवगत कराने का निर्देश कोर्ट ने दिया है। जनहित याचिका की अगली सुनवाई के लिए छह सप्ताह बाद का समय तय कर दिया है। जनहित याचिका की सुनवाई छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र अग्रवाल के डिवीजन बेंच में हुई।

कोर्ट ने कहा कि महानिदेशक जेल द्वारा दायर हलफनामे और रिपोर्ट से ये साफ है कि उप-जेल में कैदियों की स्थिति ठीक नहीं पाई गई और कुछ गतिविधियां ऐसी चल रही थीं जिससे जेल के कैदियों पर दबाव डाला गया और अवैध मांगें की गईं, जैसा कि जांच रिपोर्टों से पता चलता है। डीजी जेल ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि मारपीट करने वाले दोषी अधिकारियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज की गई है और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। अन्य अधिकारियों जिनसे पैसों का लेन-देन हुआ था, उन्हें भी निलंबित कर दिया गया है और विभागीय जांच के आदेश दे दिये गये हैं। डीजी जेल ने बताया कि घटना के बाद जेल अफसरों ने उप जेल का दौरा किया है और बंदियों का बयान भी लिया है।
