धान खरीदी बंद होने के 2 महीने बाद भी खरीदी केंद्रों में धान का उठाव कार्य बचा हुआ है. खरीदी केंद्रों में करीब 8 हज़ार मिट्रिक टन धान शेष हैं. जहाँ बारिश के बाद आफत बढ़ गई है.
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यगढ़ जिले में धान खरीदी पूरी होने के बाद दो महीने बीत चुके हैं. लेकिन इन दो महीने के भीतर भी खरीदी केंद्रों में धान का उठाव अधूरा है. लगभग सभी केंद्रों में ऐसा ही हाल है. कहीं 20 तो कही 30 क्विंटल धान पड़े हैं. जिससे सभी केंद्र प्रभारी को धान के उठाव की चिंता सताने लगी है. बता दें कि जिले के खरीदी केंद्रों में लगभग 5 लाख 39 हजार 145 मिट्रिक टन धान की खरीदी हुई है, जिसमें अभी भी लगभग 8 हज़ार मिट्रिक टन धान जाम है. धान के जल्दी उठाव के लिए समितियों की तरफ से गुहार भी लगाई जा चुकी है.
यगढ़ जिले में धान खरीदी पूरी होने के बाद दो महीने बीत चुके हैं. लेकिन इन दो महीने के भीतर भी खरीदी केंद्रों में धान का उठाव अधूरा है. लगभग सभी केंद्रों में ऐसा ही हाल है. कहीं 20 तो कही 30 क्विंटल धान पड़े हैं. जिससे सभी केंद्र प्रभारी को धान के उठाव की चिंता सताने लगी है. बता दें कि जिले के खरीदी केंद्रों में लगभग 5 लाख 39 हजार 145 मिट्रिक टन धान की खरीदी हुई है, जिसमें अभी भी लगभग 8 हज़ार मिट्रिक टन धान जाम है. धान के जल्दी उठाव के लिए समितियों की तरफ से गुहार भी लगाई जा चुकी है. बावजूद इसके धान उठाव मे लेटलटीफी जारी है. बता दें कि जिले के अधिकांश खरीदी केंद्रों मे पिछले फरवरी महीने से डीओ नहीं कटा है. जिन खरीदी केंद्रों मे एक महीने पहले डीओ जारी हुआ है, उसे भी मिलरो ने नहीं उठाया है. ईधर उठाव नहीं होने से समिति प्रभारी चिंता मे डूबे हैं. मंडियो मे रखे धान को चूहों और दिमको ने नुकसान पहुँचाना शुरू भी कर दिया है. दूसरी तरफ इन दिनों आसमानी आफत के कारण धान खराब होने का खतरा भी बना हुआ है. 

शासन के नियमानुसार खरीदी के 72 घण्टे के भीतर उठाव होना चाहिए. ऐसे मे अगर उठाव नहीं हो पाता तो सुखत मे आना तय है. जिससे जिले मे जीरो शॉर्टज का लक्ष्य हासिल कर पाना मुश्किल होगा. रायगढ़ जिले में धान की खरीदी के बाद अफसरों की लापरवाही से धान उठाव में देरी हो रही है.
