170 साल पुरानी परंपरा को मिलेगा प्रोत्साहन
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि रायपुर का ऐतिहासिक रावणभाठा मैदान लगभग 170 वर्षों से दशहरा उत्सव की गौरवशाली परंपरा का साक्षी रहा है। यह आयोजन केवल रावण दहन तक सीमित नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक एकता और सामूहिक आस्था का प्रतीक भी है। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण और संवर्धन सरकार की जिम्मेदारी है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने रावणभाठा दशहरा उत्सव के आयोजन के लिए हर साल 10 लाख रुपये देने की घोषणा की।भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपनाने का आह्वान
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन सत्य, मर्यादा, धैर्य, साहस, त्याग और न्याय के प्रति अटूट निष्ठा का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ा। रावण के पास विशाल सेना और अपार सामर्थ्य होने के बावजूद भगवान श्रीराम ने धर्मबल और दृढ़ संकल्प से विजय प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने कहा कि विजयादशमी की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब हम अपने भीतर मौजूद काम, क्रोध, मद और लोभ रूपी बुराइयों पर विजय प्राप्त करें। रावण दहन के साथ-साथ प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में सद्गुणों को अपनाने का संकल्प लेना चाहिए।
छत्तीसगढ़ से भगवान श्रीराम का गहरा संबंध
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ का भगवान श्रीराम से आत्मीय और ऐतिहासिक संबंध रहा है। माता कौशल्या का मायका होने के कारण छत्तीसगढ़ को भगवान श्रीराम का ननिहाल माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण ने छत्तीसगढ़ की धरती पर समय बिताया था। उन्होंने अयोध्या में श्रीरामलला के भव्य मंदिर का उल्लेख करते हुए कहा कि 22 जनवरी 2024 का दिन देश की आस्था और सांस्कृतिक गौरव के इतिहास में विशेष स्थान रखता है। मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार की श्रीरामलला दर्शन योजना के माध्यम से अब तक 49 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या धाम में भगवान श्रीरामलला के दर्शन कर चुके हैं।आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति का जिक्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि विजयादशमी का संदेश आज भी प्रासंगिक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और सामर्थ्य का परिचय दिया है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए इसे देश के साहस, पराक्रम और आतंकवाद के विरुद्ध संकल्प का प्रतीक बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज और राष्ट्र को अन्याय तथा बुराइयों के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए। सत्य और न्याय की रक्षा के लिए दृढ़ संकल्प और सामूहिक शक्ति जरूरी है।
