Crop Loss Compensation: फसल नुकसान का आकलन कर प्रभावित किसानों को मुआवजा देने पर होगा फैसला, कृषि विभाग ने किसानों को दी पकी धान की कटाई और सुरक्षित भंडारण की सलाह

रायपुर। छत्तीसगढ़ में चक्रवात ‘अर्नब’ के प्रभाव से कई इलाकों में बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी है। राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बदले मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। धान की फसल पकने के समय बारिश और तेज हवाओं से खेतों में खड़ी फसल गिरने, कटाई में देरी होने और कटी फसल के भीगने का खतरा बढ़ गया है।
मौसम के इस बदलाव के बीच किसानों के लिए राहत की बात यह है कि राज्य सरकार ने फसल नुकसान का आकलन कराने की बात कही है। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा के मुताबिक, बारिश थमने के बाद नुकसान का सर्वे कराया जाएगा। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित किसानों को मुआवजा देने के संबंध में फैसला लिया जाएगा।
कोंडागांव और गरियाबंद समेत कई इलाकों में बारिश का असर
चक्रवात के प्रभाव से प्रदेश में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की आशंका को देखते हुए किसानों तथा आम नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। कृषि मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 29 अक्टूबर को भी प्रदेश के कई जिलों में बारिश की संभावना है। कुछ स्थानों पर भारी से अति भारी बारिश का अनुमान भी जताया गया है।
मौसम की स्थिति को देखते हुए लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की आधिकारिक चेतावनियों पर ध्यान देने की जरूरत है। तेज हवाओं और बारिश के दौरान खुले स्थानों तथा कमजोर संरचनाओं के आसपास सावधानी बरतनी चाहिए।
बारिश रुकने के बाद होगा फसल नुकसान का सर्वे
धान की फसल को संभावित नुकसान को लेकर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा है कि बारिश रुकने के बाद राज्य सरकार सर्वे कराएगी। सर्वे के माध्यम से यह आकलन किया जाएगा कि किन क्षेत्रों में फसल को कितना नुकसान पहुंचा है।
सर्वे रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित किसानों को मुआवजा देने के संबंध में निर्णय लिया जाएगा। हालांकि, मुआवजे की राशि और पात्रता से संबंधित अंतिम जानकारी सर्वे तथा लागू नियमों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
फसल बीमा कराने वाले किसान भी लें जानकारी
फसल नुकसान की स्थिति में बीमा कराने वाले किसान अपनी पॉलिसी के प्रावधानों के अनुसार लाभ की पात्रता की जानकारी ले सकते हैं। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे फसल बीमा से संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखें और नुकसान होने पर निर्धारित समयसीमा के भीतर संबंधित बीमा कंपनी या कृषि विभाग से संपर्क करें।
बीमा का लाभ संबंधित योजना, पॉलिसी की शर्तों और निर्धारित प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। इसलिए किसानों को अपनी पात्रता की पुष्टि आधिकारिक माध्यम से करनी चाहिए।
किसानों को पकी धान की फसल सुरक्षित रखने की सलाह
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विज्ञान विभाग ने मौसम पूर्वानुमान को देखते हुए किसानों को पकी हुई धान, मक्का और तिलहन फसलों की शीघ्र कटाई कर सुरक्षित स्थान पर रखने की सलाह दी है।
जिन किसानों ने फसल काट ली है, वे उसे खुले खेत में छोड़ने के बजाय सुरक्षित स्थान पर भंडारित करें। खेतों में जलभराव रोकने के लिए पानी की निकासी की व्यवस्था करें और खड़ी फसलों की नियमित निगरानी करें।
विभाग ने किसानों को मौसम अनुकूल होने तक गेहूं, चना और मसूर जैसी रबी फसलों की बुआई टालने तथा मौसम साफ होने के बाद स्थानीय कृषि सलाह के अनुसार बुआई शुरू करने की सलाह भी दी है।
किसानों की नजर अब सर्वे और मुआवजे पर
बेमौसम बारिश और तेज हवाओं के बीच किसानों को अपनी तैयार फसल बचाने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। अब बारिश थमने के बाद होने वाले सर्वे से फसल नुकसान की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। इसके बाद ही प्रभावित किसानों को राहत और मुआवजे को लेकर सरकार के अगले कदम सामने आएंगे।
