नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन ने काली पट्टी लगाकर जताया विरोध, मांगें पूरी नहीं होने पर 18 नवंबर से प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी
रायगढ़। नर्सिंग संवर्ग के ग्रेड-पे और वेतनमान से जुड़े प्रस्ताव को लागू करने की मांग को लेकर नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन, छत्तीसगढ़ ने मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग कर्मचारियों ने काली पट्टी लगाकर काम करते हुए सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं होने पर आंदोलन को प्रदेश स्तर पर तेज किया जाएगा।
काली पट्टी लगाकर किया सांकेतिक विरोध
नर्सिंग संवर्ग के ग्रेड-पे एवं वेतनमान से संबंधित प्रस्ताव लागू करने की मांग को लेकर एसोसिएशन के आह्वान पर नर्सिंग कर्मचारियों ने विरोध दर्ज कराया। आंदोलन के तहत 16 और 17 अक्टूबर को कर्मचारियों द्वारा काली पट्टी लगाकर कार्य करने और सांकेतिक विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की गई थी।
इसी क्रम में शुक्रवार को रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग कर्मचारियों ने काली पट्टी लगाकर अपनी मांगों के समर्थन में विरोध जताया।
17 अक्टूबर को स्कूटी रैली का कार्यक्रम
एसोसिएशन के घोषित कार्यक्रम के अनुसार, 17 अक्टूबर को दोपहर 1 बजे से 2 बजे तक अस्पताल परिसर से भीमराव अंबेडकर चौक तक स्कूटी रैली निकालने का भी उल्लेख किया गया है। इस आंदोलन के जरिए नर्सिंग कर्मचारी ग्रेड-पे और वेतनमान से जुड़े प्रस्ताव को जल्द लागू करने की मांग उठा रहे हैं।
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि यदि मांगों पर समाधान नहीं होता है, तो 18 नवंबर से प्रदेश स्तर पर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जा सकता है।
14 साल से उठाई जा रही ग्रेड-पे और वेतनमान की मांग
एसोसिएशन की ओर से जारी पत्र के अनुसार, नर्सिंग संवर्ग के ग्रेड-पे एवं वेतनमान की मांग पिछले 14 वर्षों से शासन-प्रशासन के समक्ष रखी जा रही है। पत्र में बताया गया है कि इस संबंध में चिकित्सा शिक्षा विभाग और आयुक्त चिकित्सा शिक्षा के स्तर पर प्रस्ताव तैयार किए जाने का उल्लेख है।
हालांकि, एसोसिएशन का कहना है कि प्रस्ताव तैयार होने के लगभग नौ महीने बाद भी इसे लागू नहीं किया गया है। इसी वजह से नर्सिंग कर्मचारियों में नाराजगी है और वे अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
मांगों पर जल्द निर्णय लेने की अपील
नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन ने शासन-प्रशासन से ग्रेड-पे और वेतनमान के प्रस्ताव पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है। एसोसिएशन ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि आंदोलन के दौरान उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
अब मांगों पर शासन-प्रशासन की ओर से लिए जाने वाले निर्णय पर आंदोलन की आगे की दिशा निर्भर करेगी।