रायगढ़ में मां गढ़ समलाई ने मां चंद्रघंटा स्वरूप में दिए दर्शन, सवा सौ साल पुराना है मंदिर का इतिहास

रायगढ़ के ऐतिहासिक मां गढ़ समलाई मंदिर में शारदीय नवरात्रि के दौरान मां चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा

शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन मंदिर में उमड़े श्रद्धालु, राजपरिवार की आराध्या मां समलाई के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए सुबह-शाम पहुंच रहे भक्त

मां गढ़ समलाई मंदिर रायगढ़
मां गढ़ समलाई मंदिर रायगढ़

रायगढ़। शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन मंगलवार को जगत जननी मां दुर्गा के शांति, साहस, वीरता और निर्भयता के स्वरूप मां चंद्रघंटा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। इस अवसर पर रायगढ़ के ऐतिहासिक मां गढ़ समलाई मंदिर में भी भक्तिमय माहौल देखने को मिला। नवरात्रि के तीसरे दिन मां गढ़ समलाई ने मां चंद्रघंटा स्वरूप में श्रद्धालुओं को दर्शन दिए। रियासतकालीन दौर में स्थापित इस मंदिर का इतिहास लगभग सवा सौ साल पुराना बताया जाता है। नवरात्रि के दौरान सुबह और शाम दोनों समय मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की विशेष पूजा

शारदीय नवरात्रि में तृतीया तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों में तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। मां चंद्रघंटा को शांति, साहस, वीरता और निर्भयता का प्रतीक माना जाता है।

इसी धार्मिक महत्व के बीच रायगढ़ के मां गढ़ समलाई मंदिर में भी विशेष पूजा-अर्चना की गई। मंदिर में माता का आकर्षक श्रृंगार किया गया और श्रद्धालुओं की सुख-समृद्धि, खुशहाली तथा अच्छे स्वास्थ्य की कामना के साथ अखंड ज्योत प्रज्ज्वलित की गई।

मां गढ़ समलाई मंदिर रायगढ़
मां गढ़ समलाई मंदिर रायगढ़

संबलपुर से लाकर स्थापित की गई थी मां समलाई की प्रतिमा

रायगढ़ का मां गढ़ समलाई मंदिर अपने भीतर रियासतकालीन इतिहास समेटे हुए है। मान्यता के अनुसार, रायगढ़ राजपरिवार के पूर्वजों ने संबलपुर से मां समलाई की प्रतिमा ससम्मान लाकर यहां स्थापित की थी। तभी से मां समलाई रायगढ़ राजपरिवार की आराध्या के रूप में पूजी जाती हैं।

मंदिर के प्रति राजपरिवार के साथ-साथ शहर के श्रद्धालुओं की भी गहरी आस्था है। भक्त मां गढ़ समलाई के दर्शन कर परिवार की खुशहाली और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

सुबह-शाम पूजा और आरती में शामिल हो रहे श्रद्धालु

नवरात्रि के दौरान मां गढ़ समलाई मंदिर में सुबह और शाम नियमित रूप से पूजा-अर्चना और आरती की जा रही है। मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल बना हुआ है। पुरानी बस्ती के सैकड़ों श्रद्धालु प्रतिदिन सुबह-शाम माता के दर्शन और पूजन के लिए पहुंच रहे हैं।

नवरात्रि के अवसर पर मंदिर में विशेष श्रृंगार और धार्मिक अनुष्ठानों के चलते श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। भक्त माता के दर्शन कर सुख, शांति और अच्छे स्वास्थ्य की कामना कर रहे हैं।

नवरात्रि में राजपरिवार करता है पहली पूजा

मां गढ़ समलाई मंदिर की एक विशेष परंपरा यह भी है कि प्रत्येक नवरात्रि में माता की पहली पूजा रायगढ़ राजपरिवार द्वारा की जाती है। राजपरिवार की आराध्या के रूप में मां समलाई की विशेष मान्यता है।

समय के साथ यह मंदिर शहर की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया है। नवरात्रि के दौरान यहां श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बनी रहती है और भक्त पूरे श्रद्धाभाव से माता की आराधना करते हैं।

मंदिर परिसर में मां काली और भगवान शिव की भी पूजा

मां गढ़ समलाई मंदिर के बाहर स्थित मां काली के मंदिर में भी प्रत्येक नवरात्रि विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इसके साथ ही मंदिर परिसर में भगवान शंकर के लिंग स्वरूप की नियमित पूजा होती है।

शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों तक मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रहने की उम्मीद है। धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक परंपरा और नियमित पूजा-अर्चना के कारण मां गढ़ समलाई मंदिर रायगढ़ के प्रमुख आस्था स्थलों में अपनी विशेष पहचान रखता है।

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