स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त पहल; बालिकाओं को अधिकारों, समान अवसर और आत्मनिर्भरता के प्रति किया जागरूक

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर सोमवार को गर्ल्स स्कूल में स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और अधिकारों के संरक्षण पर जोर दिया गया। साथ ही समाज में बेटियों के महत्व को रेखांकित करते हुए उनके सम्मान, समानता और सशक्तिकरण का संदेश दिया गया।
बालिकाओं के अधिकारों और शिक्षा पर जोर
कार्यक्रम का उद्देश्य बालिकाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और समाज में बेटियों को लेकर सकारात्मक सोच विकसित करना रहा। इस दौरान बालिकाओं की शिक्षा को उनके उज्ज्वल भविष्य और सर्वांगीण विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि प्रत्येक बालिका को आगे बढ़ने और अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए समान अवसर मिलने चाहिए, ताकि वे अपनी क्षमताओं के दम पर समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।
स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति जागरूकता
कार्यक्रम में बालिकाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर भी जोर दिया गया। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, सुरक्षित वातावरण और शिक्षा तक पहुंच बालिकाओं के विकास के लिए आवश्यक बताए गए।
इस दौरान बालिकाओं के अधिकारों की जानकारी जन-जन तक पहुंचाने और उनके संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया गया। साथ ही परिवार और समाज की सक्रिय भागीदारी को बालिकाओं के सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।
बेटियों को समान अवसर देकर बनाएं आत्मनिर्भर
कार्यक्रम में कहा गया कि बेटियां समाज का अभिन्न अंग हैं और उनके साथ समानता का व्यवहार किया जाना चाहिए। बालिकाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराकर आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।
बेटियों को सम्मान और प्रोत्साहन मिलने से वे अपने सपनों को साकार कर सकती हैं और परिवार, समाज तथा देश के विकास में योगदान दे सकती हैं।
बालिकाओं के हित में योजनाओं के प्रति जागरूकता का संदेश
अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग की ओर से बालिकाओं के हित में संचालित योजनाओं तथा उनके बेहतर भविष्य के लिए किए जा रहे प्रयासों के प्रति जागरूकता फैलाने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम के माध्यम से बालिकाओं के अधिकारों के संरक्षण, समान अवसरों की उपलब्धता और उनके सशक्त भविष्य के निर्माण का आह्वान किया गया।
