रायपुर-बिलासपुर वंदे भारत की लेटलतीफी से यात्री परेशान, एक महीने में 20 से ज्यादा बार हुई लेट

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महंगा किराया देने के बाद भी समय पर नहीं पहुंच रहे यात्री | दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में 9 महीने में 840 ट्रेनें रद्द, निर्माण कार्यों से रेल संचालन प्रभावित

Highlights:

  • बिलासपुर-नागपुर वंदे भारत पिछले एक महीने में 20 से ज्यादा बार लेट हुई।
  • विशाखापट्टनम-रायपुर-दुर्ग वंदे भारत करीब 25 बार देरी से चली।
  • दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में नौ महीने के दौरान 840 ट्रेनें रद्द होने की जानकारी।
  • रद्द ट्रेनों में 362 एक्सप्रेस और सुपरफास्ट, 318 मेमू और 160 पैसेंजर ट्रेनें शामिल।
  • थर्ड और फोर्थ लाइन समेत कई रेल परियोजनाओं पर निर्माण कार्य जारी।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में ट्रेनों की लेटलतीफी से अब सिर्फ आम यात्री ही नहीं, बल्कि प्रीमियम किराया देने वाले यात्री भी परेशान हैं। प्रदेश में संचालित वंदे भारत और अमृत भारत एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों के संचालन में भी देरी की शिकायतें सामने आ रही हैं। यात्रियों का कहना है कि अधिक किराया देने के बावजूद उन्हें समय पर यात्रा पूरी करने की सुविधा नहीं मिल रही है। बिलासपुर-नागपुर वंदे भारत और रायपुर-दुर्ग-विशाखापट्टनम वंदे भारत के देरी से चलने के साथ ही दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में बड़ी संख्या में ट्रेनों के रद्द होने से यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है।

वंदे भारत
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रायपुर-बिलासपुर वंदे भारत की लेटलतीफी से यात्री परेशान

छत्तीसगढ़ में फिलहाल बिलासपुर-नागपुर और दुर्ग/रायपुर-विशाखापट्टनम वंदे भारत एक्सप्रेस का संचालन हो रहा है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, बिलासपुर-नागपुर वंदे भारत औसतन 30 से 40 मिनट की देरी से चल रही है। पिछले एक महीने में यह ट्रेन 20 से अधिक बार लेट हुई।

वहीं, विशाखापट्टनम-रायपुर-दुर्ग वंदे भारत एक्सप्रेस औसतन एक घंटे की देरी से चल रही है। पिछले एक महीने में इस ट्रेन के करीब 25 बार लेट होने की जानकारी सामने आई है।

अमृत भारत एक्सप्रेस रायपुर निर्धारित समय पर पहुंच रही है, लेकिन रास्ते में इसे एक से दो घंटे तक की देरी का सामना करना पड़ रहा है। यात्रियों का कहना है कि प्रीमियम ट्रेन का किराया देने के बाद भी समय की बचत और सुविधाजनक यात्रा की उम्मीद पूरी नहीं हो रही है।

बिलासपुर रेल मंडल में भी यात्रियों की परेशानी बढ़ी

बिलासपुर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे का एक महत्वपूर्ण रेल केंद्र है। यहां थर्ड और फोर्थ रेल लाइन, नई रेल लाइन तथा गेज कन्वर्जन जैसे कई बड़े प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। इन परियोजनाओं से भविष्य में रेल कनेक्टिविटी और परिचालन क्षमता बेहतर होने की उम्मीद है।

हालांकि, फिलहाल निर्माण कार्यों का असर यात्री ट्रेनों के संचालन पर पड़ रहा है। अलग-अलग रेलखंडों में काम के चलते ट्रेनों को रद्द करने के साथ ही कई ट्रेनों का मार्ग बदला जा रहा है और कुछ ट्रेनों को उनके निर्धारित गंतव्य से पहले ही समाप्त किया जा रहा है। इससे यात्रियों को यात्रा की योजना बनाने में परेशानी हो रही है।

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में 9 महीने में 840 ट्रेनें रद्द

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले नौ महीनों में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अलग-अलग सेक्शन में कुल 840 ट्रेनें रद्द की गईं। इनमें एक्सप्रेस, सुपरफास्ट, मेमू और पैसेंजर ट्रेनें शामिल हैं।

इन आंकड़ों में 362 एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनें, 318 मेमू ट्रेनें तथा 160 पैसेंजर ट्रेनें शामिल हैं। अप्रैल महीने में सबसे अधिक 234 ट्रेनें रद्द हुईं, जिससे रेल यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

महीने के अनुसार रद्द हुई ट्रेनें

  • जनवरी: 116 ट्रेनें
  • फरवरी: 36 ट्रेनें
  • मार्च: 35 ट्रेनें
  • अप्रैल: 234 ट्रेनें
  • मई: 83 ट्रेनें
  • जून: 94 ट्रेनें
  • जुलाई: 96 ट्रेनें
  • अगस्त: 74 ट्रेनें
  • सितंबर: 72 ट्रेनें

इन आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में ट्रेनों के रद्द होने की संख्या सबसे अधिक रही। हालांकि, इन आंकड़ों से अलग-अलग ट्रेनों की देरी और रद्द होने के कारणों का पूरा विवरण स्पष्ट नहीं होता।

ट्रेनें रद्द होने से रोजाना सफर करने वाले यात्री परेशान

ट्रेनों के रद्द होने और मार्ग बदलने का असर रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों के साथ लंबी दूरी का सफर करने वाले लोगों पर भी पड़ रहा है। कई बार यात्रियों को स्टेशन पहुंचने के बाद ट्रेन रद्द होने या मार्ग बदलने की जानकारी मिलती है।

इसके चलते कुछ लोगों को अपनी यात्रा की तारीख बदलनी पड़ती है, जबकि कई यात्रियों को बस या अन्य परिवहन साधनों का सहारा लेना पड़ता है। मेमू और पैसेंजर ट्रेनों के रद्द होने से स्थानीय यात्रियों की परेशानी भी बढ़ जाती है।

इन ट्रेनों से बड़ी संख्या में लोग नौकरी, कामकाज और अन्य जरूरी कार्यों के लिए रोजाना सफर करते हैं। ऐसे में ट्रेनों का रद्द होना उनके समय और यात्रा खर्च दोनों को प्रभावित करता है।

छत्तीसगढ़ में कई बड़े रेल प्रोजेक्ट पर काम जारी

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के विभिन्न हिस्सों में रेल नेटवर्क को मजबूत करने के लिए कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें थर्ड और फोर्थ रेल लाइन, नई रेल लाइन तथा गेज कन्वर्जन की परियोजनाएं शामिल हैं।

उपलब्ध रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ में 1,300 किलोमीटर से अधिक के विभिन्न रेल कार्यों का उल्लेख किया गया है। वहीं, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के क्षेत्र में अलग-अलग परियोजनाओं से जुड़े करीब 2,628 किलोमीटर के कार्य बताए गए हैं। इसके अलावा करीब 1,481 किलोमीटर के प्रोजेक्ट स्वीकृत और छत्तीसगढ़ में करीब 721 किलोमीटर के अन्य कार्य प्रस्तावित बताए गए हैं।

प्रमुख परियोजनाओं में नागपुर-झारसुगुड़ा फोर्थ लाइन, राजनांदगांव-रायपुर फोर्थ लाइन, दल्ली राजहरा-रावघाट रेल परियोजना और रायपुर-धमतरी नई रेल लाइन शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, नागपुर-झारसुगुड़ा फोर्थ लाइन का करीब 26 किलोमीटर का काम बाकी बताया जा रहा है।

रेल विकास के साथ यात्री सुविधाएं भी जरूरी

नई रेल लाइन और अतिरिक्त ट्रैक का निर्माण भविष्य में रेल कनेक्टिविटी बढ़ाने, ट्रेनों की परिचालन क्षमता सुधारने और यातायात का दबाव कम करने में मदद कर सकता है। लेकिन निर्माण कार्यों के दौरान ट्रेनों के रद्द होने और देरी से यात्रियों को होने वाली परेशानी भी महत्वपूर्ण है।

छत्तीसगढ़ में कई बड़ी रेल परियोजनाएं अभी निर्माणाधीन हैं और कुछ नए कार्य भी प्रस्तावित हैं। ऐसे में यात्रियों के लिए समय पर जानकारी, ट्रेनों के संचालन की बेहतर योजना और वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी।

वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनों में भी देरी और बड़ी संख्या में यात्री ट्रेनों के रद्द होने की स्थिति ने रेल संचालन तथा यात्री सुविधाओं को लेकर सवाल खड़े किए हैं। अब यात्रियों की अपेक्षा है कि विकास कार्यों के साथ-साथ ट्रेन संचालन को भी अधिक व्यवस्थित बनाया जाए।


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