बलौदाबाजार: दीपावली से पहले सुआ नृत्य की धूम, सामूहिक सुआ संदेश में छत्तीसगढ़ी संस्कृति की दिखी झलक

बलौदाबाजार में सामूहिक सुआ संदेश कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक सुआ नृत्य करती महिलाएं

नगर भवन में दो दिवसीय जिला स्तरीय सामूहिक सुआ नाच का आयोजन, बलौदाबाजार, रायपुर सहित कई क्षेत्रों की महिला टीमों ने दी मनमोहक प्रस्तुति; नई पीढ़ी तक लोकपरंपराओं को पहुंचाने की पहल।

Highlights

  • बलौदाबाजार नगर भवन में दो दिवसीय सामूहिक सुआ संदेश कार्यक्रम आयोजित।
  • दीपावली से पहले पारंपरिक सुआ नृत्य को लेकर महिलाओं में दिखा उत्साह।
  • बलौदाबाजार-भाटापारा और रायपुर सहित अन्य क्षेत्रों की टीमों ने लिया हिस्सा।
  • डॉ. चांदनी चंद्राकर और डॉ. देवेश वर्मा के नेतृत्व में हुआ आयोजन।
  • अतिथियों ने छत्तीसगढ़ी संस्कृति और लोकपरंपराओं के संरक्षण पर दिया जोर।
  • कार्तिक माह से राज्योत्सव तक ऐसे आयोजन कराने की उठी मांग।
सुआ नृत्य की धूम
सुआ नृत्य की धूम

बलौदाबाजार। सामूहिक सुआ संदेश में महिलाओं ने बिखेरी लोकसंस्कृति की छटा

दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही छत्तीसगढ़ में पारंपरिक सुआ नृत्य की रौनक बढ़ने लगी है। ग्रामीण अंचलों में खेती-किसानी के कामों से निवृत्त होने के बाद महिलाएं सुआ नृत्य के माध्यम से घर-घर पहुंचकर खुशहाली और समृद्धि का संदेश देती हैं। इसी लोकपरंपरा को संरक्षित करने और देश-विदेश तक छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान पहुंचाने के उद्देश्य से बलौदाबाजार के नगर भवन में दो दिवसीय सामूहिक सुआ संदेश कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कई जिलों की महिला टीमों ने दी शानदार प्रस्तुति

जिला स्तरीय सामूहिक सुआ नाच में बलौदाबाजार-भाटापारा के साथ रायपुर और अन्य क्षेत्रों से महिलाओं की टीमें शामिल हुईं। पारंपरिक वेशभूषा और लोकगीतों के साथ महिलाओं ने सुआ नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम के दौरान दर्शकों में छत्तीसगढ़ के इस पारंपरिक लोकनृत्य को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला।

अतिथियों ने की संस्कृति संरक्षण की सराहना

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रमुख अमित बघेल, छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के अध्यक्ष डॉ. अजय यादव, जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत यदु और नगर पालिका अध्यक्ष अशोक जैन शामिल हुए।

अतिथियों ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की परंपराओं और लोकसंस्कृति को संरक्षित रखने के लिए इस तरह के आयोजन जरूरी हैं। ऐसे कार्यक्रमों से नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत को जानने और उससे जुड़ने का अवसर मिलता है।

नई पीढ़ी तक परंपराएं पहुंचाना आयोजन का उद्देश्य

आयोजक डॉ. चांदनी चंद्राकर ने बताया कि छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति और लोककलाओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से सामूहिक सुआ संदेश का आयोजन किया गया है। इसमें बलौदाबाजार के अलावा रायपुर सहित अन्य जिलों के प्रतिभागियों ने भी हिस्सा लिया। आयोजन को लेकर स्थानीय लोगों में भी खासा उत्साह रहा।

वहीं आयोजक डॉ. देवेश वर्मा ने कहा कि सुआ नृत्य का पारंपरिक समय दीपावली से पहले का होता है। इसी परंपरा को ध्यान में रखते हुए इस समय आयोजन किया गया है। नवरात्रि के दौरान भी ऐसे कार्यक्रम हुए हैं, लेकिन सुआ नृत्य के वास्तविक पारंपरिक समय में आयोजन होने से लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिला।

सुआ नृत्य की धूम
सुआ नृत्य की धूम

कार्तिक माह से राज्योत्सव तक आयोजन कराने की मांग

मुख्य अतिथि अमित बघेल ने सुझाव दिया कि छत्तीसगढ़ की कला और संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार को कार्तिक माह से लेकर राज्योत्सव तक इस तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कराने चाहिए। वहीं नगर पालिका अध्यक्ष अशोक जैन ने भी छत्तीसगढ़ की परंपराओं और लोकसंस्कृति के संरक्षण के लिए ऐसे आयोजनों को लगातार जारी रखने की बात कही।

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