कुंडली मिलान के साथ युवक-युवती की सिकलसेल जांच रिपोर्ट को भी दें प्राथमिकता; जिला पंचायत में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में पुरोहितों को बीमारी के आनुवंशिक स्वरूप की दी गई जानकारी।

Highlights
- रायगढ़ जिला प्रशासन ने सिकलसेल बीमारी की रोकथाम के लिए सामाजिक जागरूकता अभियान शुरू किया।
- जिला पंचायत में शहर के पंडितों और पुरोहितों के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।
- शादी के रिश्ते तय कराते समय कुंडली के साथ सिकलसेल जांच रिपोर्ट देखने की अपील की गई।
- सिकलसेल बीमारी के आनुवंशिक स्वरूप और जांच के महत्व की जानकारी दी गई।
- कार्यक्रम में शामिल पंडितों और पुरोहितों का सम्मान भी किया गया।
रायगढ़। शादी से पहले सिकलसेल जांच को लेकर प्रशासन की नई पहल
छत्तीसगढ़ में सिकलसेल जैसी आनुवंशिक बीमारी की रोकथाम के लिए रायगढ़ जिला प्रशासन ने सामाजिक स्तर पर जागरूकता बढ़ाने की पहल शुरू की है। इसी कड़ी में शुक्रवार को जिला पंचायत में शहर के पंडितों और पुरोहितों के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में प्रशासन ने पंडितों और पुरोहितों से अपील की कि शादी-विवाह के लिए रिश्ता तय कराते समय पारंपरिक कुंडली मिलान के साथ युवक और युवती की सिकलसेल जांच रिपोर्ट को भी प्राथमिकता दें। इसका उद्देश्य विवाह से पहले बीमारी के जोखिम की जानकारी उपलब्ध कराना और आने वाली पीढ़ियों को सिकलसेल के खतरे से बचाने के लिए जागरूकता बढ़ाना है।
रिश्ता तय कराते समय जांच रिपोर्ट की जानकारी लेने की अपील
इस कार्यक्रम में ऐसे पंडितों और पुरोहितों को आमंत्रित किया गया, जिनका समाज के परिवारों से सीधा जुड़ाव रहता है और जो शादी-विवाह के लिए रिश्ते तय कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्हें सिकलसेल बीमारी के आनुवंशिक स्वरूप और इसकी रोकथाम में समय पर जांच की भूमिका के बारे में जानकारी दी गई। प्रशासन ने उनसे कहा कि जब भी वे किसी परिवार में विवाह के लिए रिश्ता तय कराएं, तो कुंडली मिलान के साथ युवक और युवती की सिकलसेल जांच के बारे में भी जानकारी लें।
साथ ही दोनों परिवारों को विवाह से पहले जांच कराने और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय परामर्श लेने के लिए प्रेरित करने की अपील की गई।
माता-पिता से बच्चों में पहुंच सकती है बीमारी
दरअसल, सिकलसेल एक आनुवंशिक बीमारी है, जो माता-पिता से बच्चों में पहुंच सकती है। ऐसे में विवाह से पहले युवक और युवती की जांच कराना महत्वपूर्ण है। जांच रिपोर्ट और चिकित्सकीय परामर्श के जरिए बीमारी से जुड़े जोखिम को समझने में मदद मिलती है।
समय रहते जांच कराने से भावी माता-पिता अपने परिवार की स्वास्थ्य संबंधी स्थिति को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं और विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर निर्णय ले सकते हैं।
सिकलसेल रोकथाम में सामाजिक भागीदारी बढ़ाने की कोशिश
रायगढ़ जिला प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य सिकलसेल जागरूकता अभियान को सरकारी प्रयासों से आगे बढ़ाकर समाज के बीच पहुंचाना है। इसके लिए पंडितों और पुरोहितों को जागरूकता अभियान से जोड़ने की कोशिश की जा रही है, ताकि शादी-विवाह जैसे सामाजिक आयोजनों के माध्यम से भी लोगों तक जांच का संदेश पहुंच सके।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी पंडितों और पुरोहितों का सम्मान भी किया गया। प्रशासन की इस पहल से सिकलसेल बीमारी की रोकथाम में सामाजिक सहभागिता बढ़ाने और परिवारों को समय रहते जांच के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है।












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